Sunday, 16 August 2026
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बिहार के 38 जिलों में मॉडल सोलर विलेज की तैयारी, BREDA ने डीपीआर के लिए निकाला टेंडर

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In This Article
  1. गांवों में सौर ऊर्जा की पूरी संभावनाओं का होगा आकलन
  2. सोलर प्लांट से लेकर सोलर सिंचाई तक कई परियोजनाएं
  3. ई-रिक्शा चार्जिंग, बायोगैस और कचरे से ऊर्जा की भी जांच
  4. गांव की आजीविका और स्थानीय संसाधनों का भी होगा अध्ययन
  5. परियोजना की क्षमता और लागत अभी तय नहीं
  6. छह महीने में तैयार होगी रिपोर्ट

बिहार के सभी जिलों में प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत मॉडल सोलर विलेज योजना के क्रियान्वयन की तैयारी शुरू हो गई है। बिहार रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (BREDA) ने इस योजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने को लेकर कंसल्टेंसी एजेंसी के चयन के लिए निविदा जारी की है। चयनित एजेंसी को राज्य के अधिकतम 38 गांवों का विस्तृत सर्वेक्षण कर उनकी ऊर्जा जरूरत, सौर ऊर्जा की संभावनाओं, मौजूदा बिजली ढांचे और उपलब्ध संसाधनों का आकलन करना होगा। इस अध्ययन के आधार पर प्रत्येक चयनित गांव के लिए मॉडल सोलर विलेज के क्रियान्वयन से जुड़ी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

BREDA की ओर से जारी RFP में कहा गया है कि प्रत्येक जिले में एक गांव को मॉडल सोलर विलेज के रूप में विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य गांवों में स्वच्छ ऊर्जा की पहुंच बढ़ाना, स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पादन के जरिए ऊर्जा जरूरतों में आत्मनिर्भरता बढ़ाना और बिजली के खर्च को कम करना है। दस्तावेज में ऐसे गांव की परिकल्पना की गई है जो 24 घंटे सौर ऊर्जा आधारित हो और जिसमें घरों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्रों को भी शामिल किया जाए।

हालांकि, यह निविदा सीधे इन गांवों में सौर परियोजनाएं लगाने के लिए नहीं है। इस चरण में एजेंसी को यह तय करना होगा कि प्रत्येक गांव के लिए किस तरह की सौर और अक्षय ऊर्जा व्यवस्था सबसे उपयुक्त होगी। इसके लिए तकनीकी, वित्तीय, नियामकीय और सामाजिक-आर्थिक पहलुओं का अध्ययन कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी। RFP के अनुसार इसी रिपोर्ट में प्रस्तावित परियोजना की क्षमता, लागत, क्रियान्वयन की रणनीति और अपेक्षित परिणाम निर्धारित किए जाएंगे।

गांवों में सौर ऊर्जा की पूरी संभावनाओं का होगा आकलन

चयनित गांवों में विस्तृत स्थल सर्वेक्षण किया जाएगा। इसमें सरकारी कार्यालयों, संस्थागत एवं सामुदायिक भवनों की छतों पर सौर संयंत्र लगाने की उपलब्ध जगह, सरकारी या पंचायत की जमीन, मौजूदा बिजली ढांचे और ग्रिड से जुड़ाव की स्थिति का अध्ययन किया जाएगा। पानी के स्रोत, जैविक संसाधन, गांव तक पहुंच, परिवहन और निर्माण की व्यवहार्यता भी देखी जाएगी। प्रस्तावित स्थानों के भौगोलिक निर्देशांक और तस्वीरें भी दर्ज की जाएंगी।

इसके साथ छतों पर लगाए जाने वाले सौर संयंत्र, जमीन पर लगाए जाने वाले सौर संयंत्र और सामुदायिक सौर संयंत्र की व्यवहार्यता देखी जाएगी। बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली और मिश्रित एवं विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा प्रणालियों का भी आकलन किया जाएगा।

प्रत्येक गांव की बिजली की मांग का भी विस्तृत आकलन होगा। इसमें वितरण ट्रांसफॉर्मर की क्षमता, उसकी कार्यशील स्थिति, अधिक भार या खराब होने की स्थिति, सरकारी भवनों का क्षेत्रफल, स्वीकृत बिजली भार और संभावित सौर क्षमता का अध्ययन शामिल होगा। प्रस्तावित सौर क्षमता को उपलब्ध छत और स्वीकृत बिजली भार के अनुरूप रखने को कहा गया है।

सोलर प्लांट से लेकर सोलर सिंचाई तक कई परियोजनाएं

RFP में मॉडल सोलर विलेज के तहत संभावित परियोजनाओं का दायरा काफी व्यापक रखा गया है। गांव में सामुदायिक सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जाने की संभावना है। ये संयंत्र छत या जमीन पर लगाए जा सकते हैं और जरूरत के अनुसार बैटरी भंडारण प्रणाली के साथ भी विकसित किए जा सकते हैं। इनसे पंचायत भवन, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र, कॉलेज, सामुदायिक भवन, सरकारी कार्यालय और आजीविका से जुड़ी इकाइयों को बिजली देने की योजना बनाई जा सकती है।

सार्वजनिक सुविधाओं के लिए सौर स्ट्रीट लाइट, सौर जल एटीएम या आरओ केंद्र और सामुदायिक केंद्रों एवं डिजिटल बुनियादी ढांचे के लिए बिजली की व्यवस्था भी परियोजना रिपोर्ट में शामिल की जा सकती है।

गांवों में रोजगार और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों के लिए भी सौर ऊर्जा का इस्तेमाल प्रस्तावित है। इसमें अनाज प्रसंस्करण, तेल निकालने और मसाला पीसने जैसी इकाइयां, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी सिलाई, बुनाई और डेयरी प्रसंस्करण गतिविधियां शामिल हैं। सौर ऊर्जा आधारित कोल्ड स्टोरेज, दूध ठंडा करने की व्यवस्था, खाद्य संरक्षण, सौर ड्रायर, सौर कुकर और सामुदायिक रसोई की भी व्यवहार्यता देखी जाएगी।

कृषि क्षेत्र में सौर सिंचाई पंप, विशेष रूप से पीएम-कुसुम योजना के तहत, तथा सामुदायिक जलापूर्ति और सिंचाई व्यवस्था को शामिल किया जा सकता है।

ई-रिक्शा चार्जिंग, बायोगैस और कचरे से ऊर्जा की भी जांच

मॉडल सोलर विलेज की योजना में केवल सौर ऊर्जा तक सीमित व्यवस्था नहीं है। RFP में सौर ऊर्जा से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन और ई-रिक्शा चार्जिंग केंद्र स्थापित करने की संभावनाओं का भी आकलन किया जाएगा।

इसके अलावा गांवों में बायोगैस संयंत्र और कचरे से ऊर्जा बनाने वाली इकाइयों की व्यवहार्यता भी देखी जाएगी। ई-गवर्नेंस, टेलीमेडिसिन और प्रशिक्षण के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित करने की संभावना भी परियोजना रिपोर्ट में शामिल है।

इसके साथ कृषि-सौर प्रणाली, तैरते हुए सौर संयंत्र, छोटे पवन ऊर्जा संयंत्र और छोटी या लघु जलविद्युत परियोजनाओं की व्यवहार्यता भी गांव की परिस्थितियों के आधार पर जांची जा सकती है। दस्तावेज में मिश्रित अक्षय ऊर्जा प्रणालियों की संभावना का भी आकलन करने को कहा गया है।

गांव की आजीविका और स्थानीय संसाधनों का भी होगा अध्ययन

परियोजना रिपोर्ट तैयार करने वाली एजेंसी को गांव की मौजूदा आजीविका गतिविधियों और आय के स्रोतों की पहचान करनी होगी। स्थानीय कौशल, उपलब्ध संसाधनों और बाजार तक पहुंच का आकलन करने के बाद ऊर्जा आधारित नई आजीविका गतिविधियों की संभावनाएं भी तलाशनी होंगी।

इसका मतलब है कि मॉडल सोलर विलेज की योजना केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं होगी। BREDA की योजना में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कृषि, छोटे उद्योग, सार्वजनिक सुविधाओं, परिवहन, स्वास्थ्य, डिजिटल सेवाओं और ग्रामीण रोजगार से जोड़ने की संभावनाओं का अध्ययन भी शामिल है।

परियोजना की क्षमता और लागत अभी तय नहीं

इस टेंडर से जुड़ा एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि दस्तावेज में 38 गांवों के लिए कोई एक समान सौर क्षमता या कुल परियोजना लागत तय नहीं की गई है। RFP के अनुसार एजेंसी को प्रत्येक गांव का सर्वेक्षण करने के बाद सबसे उपयुक्त सौर व्यवस्था, उसकी क्षमता, लागत, क्रियान्वयन योजना और अपेक्षित परिणामों का निर्धारण करना होगा।

इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि सभी 38 गांवों में समान क्षमता के सौर संयंत्र लगाए जाएंगे या पूरी योजना की कोई निश्चित लागत तय हो चुकी है। ये आंकड़े विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार होने के बाद सामने आएंगे।

छह महीने में तैयार होगी रिपोर्ट

RFP के अनुसार परामर्श अनुबंध की अवधि छह महीने होगी। चयनित एजेंसी को अनुबंध पर हस्ताक्षर के 15 दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट जमा करनी होगी। इसके बाद गांववार सर्वेक्षण, बिजली की मांग का आकलन, तकनीकी व्यवहार्यता और परियोजना की योजना तैयार की जाएगी।

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