In This Article
बिहार में गंगा नदी के अतिरिक्त बाढ़ के पानी को बदुआ बांध और खड़गपुर जलाशय तक पहुंचाने के लिए ₹1,623.28 करोड़ की बड़ी जल संसाधन परियोजना पर काम किया जा रहा है। जल संसाधन विभाग के तारापुर सिंचाई प्रमंडल से संबंधित समझौते के अनुसार, “गंगा नदी के अतिरिक्त बाढ़ के पानी को बदुआ एवं खड़गपुर जलाशयों में स्थानांतरित करने” के लिए 7 मई 2025 को अनुबंध किया गया था।
परियोजना का अनुबंध मेसर्स जीवीपीआर इंजीनियर्स लिमिटेड के साथ किया गया है। समझौते की राशि ₹1,62,328.05 लाख यानी ₹1,623.2805 करोड़ है। इसके लिए ₹32.46 करोड़ की कार्य-निष्पादन गारंटी भी दी गई है। पूरी परियोजना को 17 प्रमुख कार्यों में विभाजित किया गया है, जिनमें सर्वेक्षण, डिजाइन, पंप गृह, पाइपलाइन, विद्युत व्यवस्था, निगरानी प्रणाली, सड़क, भवन और जलाशयों की मौजूदा संरचनाओं से जुड़े कार्य शामिल हैं।
सुल्तानगंज से बदुआ और खड़गपुर तक बनेगा जल हस्तांतरण तंत्र
परियोजना के तहत गंगा घाट, सुल्तानगंज, भागलपुर के पास पानी लेने के लिए एक पंप गृह बनाया जाएगा। इसकी जल निकासी क्षमता 3,47,225 लीटर प्रति मिनट होगी। वहीं बांका के बिजीखोरवा सिंचाई कॉलोनी में एक जल संचयन टंकी और पंप गृह बनाया जाएगा, जहां 2,75,697 लीटर प्रति मिनट की क्षमता वाला पंपिंग तंत्र बदुआ बांध के लिए काम करेगा।
गंगा से पानी लाने के लिए इस परियोजना में करीब 74.31 किलोमीटर लंबी मुख्य पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसमें चार पाइपलाइन खंड होंगे, जिनकी लंबाई 30.81, 23.94, 17.91 और 1.65 किलोमीटर होगी। पाइपलाइन के रास्ते में आने वाले पेड़ों और बिजली के खंभों को हटाकर दूसरी जगह लगाने की भी व्यवस्था की गई है।
पाइपलाइन में सड़क और राजमार्ग पार करने के लिए विशेष संरचनाएं बनाई जाएंगी। पानी का दबाव नियंत्रित करने के लिए अलग व्यवस्था होगी। जल-आघात से बचाव के उपकरण, हवा निकालने वाले वाल्व, स्लुइस वाल्व, टी-जोड़ और पाइप को मजबूती देने वाले अन्य सुरक्षा इंतजाम भी किए जाएंगे।
राज्य और राष्ट्रीय राजमार्ग, नहर, निचले इलाकों और संवेदनशील स्थानों पर पाइपलाइन को अतिरिक्त सुरक्षा दी जाएगी। पाइप के बाहर सीमेंट-मोर्टार की परत और अंदर खाद्य-ग्रेड एपॉक्सी की परत लगाई जाएगी, ताकि पाइप लंबे समय तक सुरक्षित रहे और पानी की गुणवत्ता भी बनी रहे।
बदुआ बांध और खड़गपुर झील दोनों स्थानों पर पानी पहुंचाने के लिए जल वितरण कुंड बनाए जाएंगे। इसके अलावा दोनों मौजूदा संरचनाओं में पुराने फाटकों को बदलने, मरम्मत और अन्य यांत्रिक कार्य भी किए जाएंगे। दस्तावेज में इन कार्यों के लिए 110 वर्ग मीटर क्षेत्र का उल्लेख है।

बिजली व्यवस्था और निगरानी तंत्र भी होगा
इतने बड़े पंपिंग सिस्टम को बिजली देने के लिए दो 15-15 किलोमीटर लंबी विद्युत लाइनें बिछाई जाएंगी। इनमें से एक लाइन पानी लेने वाले पंप गृह और दूसरी जल संचयन टंकी तक बिजली पहुंचाएगी।
इसके लिए 132 किलोवोल्ट से 33 किलोवोल्ट और 33 किलोवोल्ट से 11 किलोवोल्ट तक के विद्युत उपकेंद्र बनाए जाएंगे। इन उपकेंद्रों में ट्रांसफॉर्मर, सर्किट ब्रेकर, बिजली काटने वाले उपकरण, स्वचालित नियंत्रण प्रणाली, संधारित्र बैंक, बैटरी और अन्य जरूरी विद्युत उपकरण लगाए जाएंगे।
परियोजना में बड़े जल पंप, मोटर, गति नियंत्रक, विद्युत तार, विभिन्न प्रकार के वाल्व, फाटक, क्रेन, जनरेटर, सहायक विद्युत परिवर्तक और अन्य उपकरण लगाए जाएंगे। इन उपकरणों की डिजाइन, निर्माण, आपूर्ति, जांच, स्थापना और संचालन शुरू करने का कार्य भी अनुबंध का हिस्सा है।
पूरे जल हस्तांतरण तंत्र की निगरानी और नियंत्रण के लिए पर्यवेक्षण नियंत्रण एवं आंकड़ा प्राप्ति प्रणाली स्थापित की जाएगी। यह व्यवस्था सुल्तानगंज के पंप गृह, बिजीखोरवा के जल संचयन टंकी-पंप गृह और बिहमा गांव के टी-जोड़ तक होगी।

सड़क, भवन और सहायक ढांचे भी बनेंगे
परियोजना में केवल जल हस्तांतरण की मुख्य संरचनाएं ही नहीं, बल्कि इससे जुड़े सहायक ढांचे भी बनाए जाएंगे। सुल्तानगंज के पंप गृह और बिजीखोरवा के जल संचयन टंकी-पंप गृह के पास चारदीवारी, प्रवेश द्वार, सुरक्षा कक्ष, पहुंच मार्ग और आंतरिक सीमेंट-कंक्रीट सड़कें बनाई जाएंगी। बिहमा, तारापुर में भी सुरक्षा कक्ष का निर्माण किया जाएगा।
सुल्तानगंज और बिजीखोरवा में कार्यालय सह आवासीय भवन भी बनाए जाएंगे। दोनों भवनों का क्षेत्रफल 600-600 वर्ग मीटर होगा। परियोजना के प्रारंभिक चरण में विस्तृत सर्वेक्षण, डिजाइन, भूमि अधिग्रहण तथा वन, सड़क निर्माण विभाग, इंडियन ऑयल, रेलवे, गेल और अन्य संबंधित संस्थाओं से आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने का प्रावधान है।
निर्माण कार्य पूरा होने के बाद तीन महीने का सफल परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद ठेकेदार को पांच वर्षों तक पंप, पाइपलाइन, मोटर, वाल्व, फाटक, क्रेन, निगरानी प्रणाली, विद्युत उपकेंद्र, दबावयुक्त मुख्य पाइपलाइन, दबाव सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित सिविल एवं विद्युत ढांचे का संचालन एवं रखरखाव करना होगा।
कुल मिलाकर, ₹1,623.28 करोड़ की यह परियोजना गंगा के अतिरिक्त बाढ़ के पानी को बदुआ बांध और खड़गपुर जलाशय तक पहुंचाने के लिए एक व्यापक जल हस्तांतरण तंत्र तैयार करेगी। इसमें 74.31 किलोमीटर की पाइपलाइन व्यवस्था, 30 किलोमीटर विद्युत पारेषण लाइन, विद्युत उपकेंद्र, पंप गृह, निगरानी तंत्र और जल वितरण संरचनाएं शामिल हैं। परियोजना से जुड़े प्रमुख स्थानों में सुल्तानगंज, भागलपुर, बिजीखोरवा, बांका, बदुआ बांध, खड़गपुर झील, बिहमा और तारापुर शामिल हैं।



