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दरभंगा में निर्माणाधीन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) परिसर के विकास कार्यों को आगे बढ़ाते हुए जल संसाधन विभाग के बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, दरभंगा ने अर्थ फिलिंग और लेवलिंग कार्य के लिए तीन अलग-अलग निविदाएं जारी की हैं। इन तीनों कार्यों की कुल अनुमानित लागत ₹183.58 करोड़ है।
जारी निविदा के अनुसार, पंचायत पंचोभ, प्रखंड बहादुरपुर स्थित AIIMS दरभंगा कैंपस में भूमि भराई एवं समतलीकरण का कार्य तीन भागों में कराया जाएगा। प्रत्येक पैकेज की निर्माण अवधि 9 माह निर्धारित की गई है।
तीन पैकेज में होगा कार्य
पहले पैकेज के तहत AIIMS कैंपस के पार्ट-1 क्षेत्र में अर्थ फिलिंग एवं लेवलिंग कार्य कराया जाएगा। इस कार्य की अनुमानित लागत ₹67.26 करोड़ निर्धारित की गई है।
दूसरे पैकेज में पार्ट-2 क्षेत्र को शामिल किया गया है, जिसकी अनुमानित लागत ₹73.69 करोड़ है। यह तीनों पैकेजों में सबसे बड़ा कार्य है।
वहीं तीसरे पैकेज के तहत पार्ट-3 क्षेत्र में अर्थ फिलिंग एवं लेवलिंग कार्य कराया जाएगा। इस कार्य की अनुमानित लागत ₹42.63 करोड़ निर्धारित की गई है।
23 जून तक जमा किए जा सकेंगे टेंडर
निविदा दस्तावेज के अनुसार, इच्छुक एजेंसियां 19 जून 2026 सुबह 10 बजे से 23 जून 2026 अपराह्न 3 बजे तक ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के माध्यम से अपने प्रस्ताव जमा कर सकेंगी।
तकनीकी बोलियां 25 जून 2026 को अपराह्न 3:30 बजे खोली जाएंगी। जबकि वित्तीय बोली खोलने की तिथि बाद में सक्षम प्राधिकारी द्वारा घोषित की जाएगी।
प्री-बिड बैठक समस्तीपुर में आयोजित होगी
परियोजना से संबंधित प्री-बिड बैठक 20 जून 2026 को दोपहर 2 बजे मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निकासी, जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर कार्यालय में आयोजित की जाएगी।
निविदा प्रक्रिया राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी बोली (National Competitive Bidding) के तहत पूरी तरह ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली के माध्यम से संचालित की जाएगी।
परियोजना के लिए निर्धारित की गई ईएमडी राशि
पहले पैकेज के लिए ₹77.27 लाख, दूसरे पैकेज के लिए ₹83.69 लाख और तीसरे पैकेज के लिए ₹52.64 लाख की अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (EMD) निर्धारित की गई है।
तीनों पैकेजों के लिए निविदा दस्तावेज शुल्क ₹10,000 रखा गया है, जबकि बेल्ट्रॉन को देय प्रोसेसिंग शुल्क ₹5,900 निर्धारित किया गया है।
AIIMS दरभंगा परियोजना के लिए महत्वपूर्ण कार्य
AIIMS दरभंगा कैंपस के विकास के लिए भूमि भराई और समतलीकरण कार्य को आधारभूत निर्माण गतिविधियों में महत्वपूर्ण माना जाता है। इस कार्य के पूरा होने के बाद परिसर में प्रस्तावित अस्पताल, शैक्षणिक भवन, छात्रावास और अन्य अवसंरचना सुविधाओं के निर्माण के लिए भूमि तैयार होगी।
