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बिहार के प्रमुख पर्यटन केंद्र राजगीर में पर्यटकों के लिए आधुनिक आवास सुविधाओं के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नालंदा वन प्रमंडल, बिहारशरीफ के तहत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए इको-फ्रेंडली कॉटेज, नाइट स्टे सुविधाएं और संबंधित पर्यटन अवसंरचना विकसित करने की योजना पर काम आगे बढ़ाया गया है।
यह परियोजना राजगीर में पर्यटन सुविधाओं को मजबूत करने और पर्यटकों को बेहतर आवास अनुभव उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई है। दस्तावेज के अनुसार, राजगीर की ऐतिहासिक, धार्मिक और पारिस्थितिक महत्व को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण अनुकूल पर्यटन अवसंरचना विकसित की जाएगी।
महादेवपुर मौजा में विकसित हो सकती है परियोजना
निविदा दस्तावेज के अनुसार, परियोजना का विकास राजगीर के महादेवपुर मौजा अथवा नालंदा वन प्रमंडल द्वारा चिन्हित किसी अन्य उपयुक्त सरकारी भूमि पर किया जा सकता है। विकास कार्यों में पर्यावरणीय संवेदनशीलता, प्राकृतिक भू-आकृति और सौंदर्यपरक डिजाइन को विशेष महत्व दिया जाएगा।
विभाग का लक्ष्य ऐसी पर्यटन अवसंरचना विकसित करना है जो प्राकृतिक परिवेश के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए पर्यटकों को उच्च गुणवत्ता वाली सुविधाएं प्रदान कर सके।
कॉटेज के साथ विकसित होगी आधुनिक पर्यटन अवसंरचना
परियोजना के तहत इको-फ्रेंडली कॉटेज, आवासीय इकाइयों, रिसेप्शन क्षेत्र, विजिटर सुविधाओं और कॉमन यूटिलिटी एरिया का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा आंतरिक सड़कें, पाथवे, लैंडस्केपिंग, हॉर्टिकल्चर कार्य और अन्य आवश्यक अवसंरचना भी विकसित की जाएगी।
साथ ही जलापूर्ति प्रणाली, ड्रेनेज नेटवर्क, सीवरेज सिस्टम, विद्युत आपूर्ति, प्रकाश व्यवस्था, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और अन्य उपयोगिता सेवाओं का भी निर्माण किया जाएगा।
ग्लास ब्रिज और जू सफारी के पर्यटन सर्किट को मिलेगा बल
दस्तावेज में इस परियोजना को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रमुख इको-टूरिज्म पहल बताया गया है। परियोजना से राजगीर के मौजूदा पर्यटन आकर्षणों जैसे ग्लास ब्रिज और जू सफारी को अतिरिक्त समर्थन मिलने की उम्मीद है।
विभाग का मानना है कि यह परियोजना पूर्वी भारत में राजगीर को प्रकृति आधारित पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में और मजबूत करेगी।
18 माह में पूरा करना होगा निर्माण कार्य
निविदा दस्तावेज के अनुसार, चयनित एजेंसी को परियोजना का निर्माण कार्य 18 माह के भीतर पूरा करना होगा। निविदा के लिए ₹70 लाख की अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (EMD) निर्धारित की गई है।
इच्छुक एजेंसियां 30 जून 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। तकनीकी बोलियां 1 जुलाई 2026 को खोली जाएंगी, जबकि वित्तीय बोलियों की तिथि बाद में घोषित की जाएगी।
पर्यावरण अनुकूल निर्माण और उच्च गुणवत्ता पर रहेगा जोर
निविदा दस्तावेज में स्पष्ट किया गया है कि परियोजना के निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री, आधुनिक निर्माण तकनीकों और पर्यावरण अनुकूल विकास पद्धतियों का उपयोग किया जाएगा। एजेंसियों को टिकाऊ, ऊर्जा दक्ष और मौसम प्रतिरोधी अवसंरचना विकसित करनी होगी।
इसके अलावा परियोजना के विकास में प्राकृतिक परिदृश्य, जैविक संतुलन और पारिस्थितिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए कार्य करने का निर्देश दिया गया है।


