In This Article
- बिहार को ITMS की जरूरत क्यों पड़ी?
- क्या है Intelligent Traffic Management System (ITMS)?
- 500 स्थानों पर स्थापित होगी प्रणाली
- कौन-कौन सी तकनीकें होंगी शामिल?
- Vahan Database और e-Courts से होगा एकीकरण
- PPP आधारित Challan Issuance Model पर होगा क्रियान्वयन
- सरकार पर नहीं पड़ेगा प्रत्यक्ष वित्तीय भार
- 14 माह में होगा कार्यान्वयन, 10 वर्षों तक होगा संचालन
- Vision 2030 के लक्ष्य हासिल करने में मिलेगी मदद
बिहार सरकार ने सड़क सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए Public Private Partnership (PPP) मॉडल पर Intelligent Traffic Management System (ITMS) परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर 2026-27 से 2037-38 तक कुल ₹622.04 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
यह परियोजना मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 136A और संबंधित नियमों के तहत इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन प्रणाली को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लागू की जा रही है।
राज्य सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था सड़क दुर्घटनाओं, यातायात नियम उल्लंघनों और उनसे होने वाली मौतों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
बिहार को ITMS की जरूरत क्यों पड़ी?
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में राज्य में 12,253 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 9,682 लोगों की मौत हुई। राज्य में लगभग 1.57 करोड़ पंजीकृत वाहन और 1.45 लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है। वर्तमान में बिहार में प्रतिदिन औसतन 30 सड़क दुर्घटनाएं और 24 मौतें दर्ज हो रही हैं।
सरकार का मानना है कि सड़क सुरक्षा की इस चुनौती का प्रभावी समाधान केवल तकनीक आधारित निगरानी और प्रवर्तन प्रणाली के माध्यम से ही संभव है। इसी उद्देश्य से ITMS परियोजना को लागू करने का निर्णय लिया गया है।
क्या है Intelligent Traffic Management System (ITMS)?
Intelligent Traffic Management System (ITMS) एक आधुनिक तकनीक आधारित ट्रैफिक निगरानी और प्रवर्तन प्रणाली है। इसके माध्यम से सड़क पर होने वाले विभिन्न यातायात नियम उल्लंघनों की स्वतः पहचान की जा सकेगी और इलेक्ट्रॉनिक चालान जारी किए जा सकेंगे।
यह प्रणाली कैमरों, सेंसर, सॉफ्टवेयर और डेटा इंटीग्रेशन के माध्यम से कार्य करेगी तथा ट्रैफिक नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने में सहायता करेगी।
500 स्थानों पर स्थापित होगी प्रणाली
परियोजना के तहत राज्य के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों, दुर्घटना संभावित स्थलों (Black Spots) और अधिक यातायात घनत्व वाले मार्गों पर चरणबद्ध तरीके से ITMS अवसंरचना स्थापित की जाएगी।
पहले चरण में 200 स्थानों पर प्रणाली स्थापित की जाएगी। इसके बाद अगले चरण में 300 अतिरिक्त स्थानों को शामिल किया जाएगा। इस प्रकार कुल 500 स्थानों पर ITMS नेटवर्क विकसित किया जाएगा।
इसके अलावा राज्य स्तर पर एक Central Traffic Management Centre (TMC) तथा 37 जिला स्तरीय Viewing Centres भी स्थापित किए जाएंगे।
कौन-कौन सी तकनीकें होंगी शामिल?
ITMS परियोजना के तहत कई आधुनिक निगरानी और प्रवर्तन प्रणालियां स्थापित की जाएंगी। इनमें शामिल हैं:
- Spot Speed Violation Detection System
- Automatic Number Plate Recognition (ANPR)
- Red Light Violation Detection System
- Seat Belt Detection System
- Helmet Detection System
- Mobile Phone Usage Detection
- Wrong Side Driving Detection
- Triple Riding Detection
- e-Detection System
इन तकनीकों के माध्यम से विभिन्न प्रकार के यातायात नियम उल्लंघनों की स्वतः पहचान की जा सकेगी।
Vahan Database और e-Courts से होगा एकीकरण
परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू विभिन्न सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ इसका एकीकरण है। ITMS को Vahan Database, e-DAR, Crime and Criminal Tracking Network & Systems (CCTNS), e-Courts, NIC और अन्य संबंधित प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा।
इससे नियम उल्लंघन की पहचान, वाहन सत्यापन और ई-चालान प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सकेगा।
PPP आधारित Challan Issuance Model पर होगा क्रियान्वयन
Infrastructure Development Authority (IDA) की बैठकों में परियोजना के वित्तीय मॉडल, तकनीकी संरचना और क्रियान्वयन व्यवस्था पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। उद्योग जगत, सार्वजनिक उपक्रमों, सिस्टम इंटीग्रेटर्स, उपकरण निर्माताओं और अन्य हितधारकों से व्यापक परामर्श के बाद PPP आधारित Challan Issuance Model को परियोजना के लिए उपयुक्त पाया गया।
परियोजना का Design, Supply, Implementation और Integration PPP मॉडल पर किया जाएगा।
सरकार पर नहीं पड़ेगा प्रत्यक्ष वित्तीय भार
परियोजना के तहत चयनित एजेंसी पूरी पूंजीगत लागत (CAPEX) और परिचालन लागत (OPEX) वहन करेगी। एजेंसी को भुगतान केवल स्वीकृत और वास्तविक ई-चालानों के आधार पर निर्धारित दरों पर किया जाएगा।
14 माह में होगा कार्यान्वयन, 10 वर्षों तक होगा संचालन
परियोजना के लिए 14 माह की Implementation Period निर्धारित की गई है। पहले 10 माह में 200 स्थानों पर प्रणाली स्थापित कर Partial Go-Live किया जाएगा। इसके बाद अगले 4 माह में शेष स्थानों पर Go-Live सुनिश्चित किया जाएगा।
परियोजना के तहत 120 माह यानी 10 वर्षों तक Operation and Maintenance (O&M) का कार्य भी किया जाएगा।
Vision 2030 के लक्ष्य हासिल करने में मिलेगी मदद
राज्य सरकार का मानना है कि ITMS परियोजना सड़क सुरक्षा, यातायात अनुशासन और इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन व्यवस्था को मजबूत करेगी। इसके साथ ही Vision 2030 के तहत सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों में 50 प्रतिशत तक कमी लाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी।


