Tuesday, 11 August 2026
Patna
Bihar Infra Tales

पटना में कचरा प्रबंधन के लिए ₹555.32 करोड़ का टेंडर, 4 साल तक घर-घर से कचरा उठाने से लेकर सड़क सफाई तक की जिम्मेदारी

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पटना कचरा प्रबंधन
In This Article
  1. 75 वार्डों में लागू होगी नई व्यवस्था
  2. 4.27 लाख प्रतिष्ठानों को कवर करने की योजना
  3. घर से उठेगा कचरा, मौके पर ही होगी सेग्रीगेशन
  4. कमर्शियल क्षेत्रों में दिन में दो बार कलेक्शन
  5. सड़क, फुटपाथ और नालियों की सफाई भी contract में
  6. साल में तीन बार होगी नालियों की desilting
  7. 42 ट्रांसफर स्टेशनों को भी व्यवस्था में जोड़ा जाएगा
  8. हजारों कर्मचारियों और बड़ी फ्लीट की जरूरत
  9. PMC के पास पहले से 314 ई-रिक्शा और 493 LCV
  10. नई फ्लीट में Electric और CNG वाहनों पर जोर
  11. GPS, RFID और MIS से होगी निगरानी
  12. 24 घंटे में शिकायत दूर करने का लक्ष्य
  13. जागरूकता अभियान भी contractor की जिम्मेदारी
  14. ₹270 करोड़ औसत टर्नओवर वाले bidder ही ले सकेंगे हिस्सा
  15. 150 दिनों में 100% डोर-टू-डोर कलेक्शन

पटना नगर निगम के 75 वार्डों में लागू होगी एकीकृत व्यवस्था; डोर-टू-डोर कलेक्शन, कचरे की छंटाई, ट्रांसफर स्टेशन तक परिवहन, रोड स्वीपिंग, नाला सफाई और डिजिटल मॉनिटरिंग शामिल

पटना नगर निगम ने शहर की ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को लेकर ₹555.32 करोड़ की अनुमानित लागत का बड़ा टेंडर जारी किया है। इसके तहत चयनित एजेंसी को नगर निगम क्षेत्र में चार वर्षों तक घर-घर से नगरपालिका ठोस कचरे का संग्रहण, उसका पृथक्करण, ट्रांसफर स्टेशन या प्रोसेसिंग साइट तक परिवहन और मैनुअल रोड स्वीपिंग का काम करना होगा। संतोषजनक प्रदर्शन की स्थिति में अनुबंध को आपसी सहमति से एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।

75 वार्डों में लागू होगी नई व्यवस्था

पटना नगर निगम के 75 वार्डों को पटलीपुत्र, नूतन राजधानी, कंकड़बाग, बांकीपुर, पटना सिटी और अजीमाबाद समेत छह सर्किलों में बांटा गया है। टेंडर का दायरा नगर निगम के इन क्षेत्रों के अलावा हाउसिंग बोर्ड, लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों और निगम द्वारा भविष्य में शामिल किए जाने वाले अन्य क्षेत्रों तक भी बढ़ाया जा सकता है।

RFP के अनुसार 2026 में पटना की अनुमानित आबादी 23.69 लाख और अनुमानित households की संख्या करीब 4.74 लाख है। शहर में 322 कॉलोनी, सेक्टर, टाउनशिप और GHS तथा 42 ट्रांसफर स्टेशन या सेकेंडरी कलेक्शन प्वाइंट भी दर्ज किए गए हैं।

4.27 लाख प्रतिष्ठानों को कवर करने की योजना

नगर निगम के दस्तावेज के मुताबिक इस परियोजना के तहत सभी आवासीय और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को कवर किया जाना है। सिटी प्रोफाइल में कुल 4,27,356 establishments दर्ज हैं। इसमें घरों और हॉस्टलों से लेकर फ्लैट, दुकानें, निजी कार्यालय, अस्पताल, होटल, बैंक, सरकारी कार्यालय, शिक्षण संस्थान, पेट्रोल पंप और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल हैं।

RFP की property-wise table में अलग-अलग आवासीय श्रेणियों के लिए 3,42,892 और व्यावसायिक श्रेणियों के लिए 61,617 प्रतिष्ठानों का विवरण दिया गया है। हालांकि इन श्रेणीवार आंकड़ों और सिटी प्रोफाइल में दिए गए 4,27,356 establishments के आंकड़े में अंतर है और दस्तावेज में इसका अलग स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।

घर से उठेगा कचरा, मौके पर ही होगी सेग्रीगेशन

चयनित एजेंसी को घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से गीला, सूखा, प्लास्टिक, इनर्ट, घरेलू खतरनाक और सैनिटरी कचरे का संग्रहण करना होगा। यदि कचरा स्रोत पर अलग-अलग नहीं दिया जाता है, तो एजेंसी को उसे प्राप्त करते समय segregate करना होगा। वहीं नगर निगम IEC गतिविधियों, प्रोत्साहन और जुर्माने के जरिए लोगों को source segregation के लिए प्रेरित और बाध्य करेगा।

घर-घर से उठाए गए कचरे के साथ garbage vulnerable points, dustbins, bulk waste generators और sweeping से निकलने वाले कचरे को भी निर्धारित transfer stations या processing sites तक पहुंचाना होगा। परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों में GPS और MIS आधारित monitoring व्यवस्था अनिवार्य होगी।

कमर्शियल क्षेत्रों में दिन में दो बार कलेक्शन

RFP के अनुसार commercial और public areas में कचरा संग्रहण दिन में दो बार किया जाएगा, जिसमें night shift भी शामिल होगी। Residential areas में दिन में एक बार door-to-door collection का प्रावधान है। कचरे को खुले में या सड़क पर जमा करके कई बार handling करने के बजाय निर्धारित वाहनों से सीधे उठाकर ले जाना होगा।

कचरा संग्रहण और परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहनों को covered और compartmentalised रखना होगा। वाहनों की नियमित सफाई और disinfection भी contractor की जिम्मेदारी होगी।

सड़क, फुटपाथ और नालियों की सफाई भी contract में

यह परियोजना सिर्फ कचरा उठाने तक सीमित नहीं है। चयनित एजेंसी को मुख्य सड़कों, service roads, internal roads, गलियों, संकरी गलियों, फुटपाथ, pavements, road berms, central verges, kerb channels, curb और drains की sweeping तथा cleaning करनी होगी। उद्देश्य संबंधित क्षेत्रों को 24 घंटे litter और dust-free बनाए रखना है।

Manual sweeping के लिए दो शिफ्ट निर्धारित की गई हैं। पहली शिफ्ट सुबह 7 बजे से 11 बजे और दूसरी दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक होगी। आवश्यकता के अनुसार नगर निगम के साथ consultation के बाद इसमें बदलाव किया जा सकता है।

साल में तीन बार होगी नालियों की desilting

टेंडर में सभी प्रकार की नालियों की साल में तीन बार desilting का प्रावधान है। इनमें से कम-से-कम एक बार की सफाई मानसून शुरू होने से पहले पूरी करनी होगी। इसके अलावा VVIP visits, special events और monsoon session जैसे मौकों पर जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त manpower उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी contractor की होगी।

42 ट्रांसफर स्टेशनों को भी व्यवस्था में जोड़ा जाएगा

पटना में 42 transfer station या secondary collection point sites को project profile में शामिल किया गया है। जरूरत के अनुसार चयनित एजेंसी को transfer stations को design, develop, construct, operate और maintain करना होगा। इसके साथ compactor bins, compactor machines और hook loaders जैसे उपकरणों की व्यवस्था भी करनी होगी।

RFP में transfer station establishment की लागत के लिए SBM(U) 2.0 guideline के आधार पर ₹4.5 लाख प्रति टन का reference दिया गया है और इसे project के CAPEX estimation में शामिल किया जाना है।

हजारों कर्मचारियों और बड़ी फ्लीट की जरूरत

कचरा संग्रहण और सफाई व्यवस्था के लिए manpower की आवश्यकता CPHEEO और राज्य guidelines के आधार पर तय की गई है। Door-to-door collection के लिए हर 200 households पर दो कर्मचारी रखने होंगे। Low और medium-density roads के लिए प्रति किलोमीटर दो कर्मचारी, जबकि high-density और commercial roads के लिए प्रति 1,000 running metres तीन कर्मचारी रखने का प्रावधान है।

इसके अलावा surface drain cleaning के लिए हर पांच wards पर पांच सदस्यों की टीम, प्रत्येक ward में तीन supervisors, QRT teams, vehicle drivers और assistants, fogging teams तथा complaint centre के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था करनी होगी।

PMC के पास पहले से 314 ई-रिक्शा और 493 LCV

RFP में नगर निगम की मौजूदा वाहन व्यवस्था का भी विवरण दिया गया है। 2026 के आंकड़ों के अनुसार PMC के पास 314 e-rickshaws, 493 LCV/auto tippers, 11 refuse/portable compactors, 521 hand carts और 98 JCB/dumpers दर्ज हैं।

इन मौजूदा वाहनों को “as is where is” basis पर contractor को उपलब्ध कराया जा सकता है। एजेंसी को इनकी remaining useful life को ध्यान में रखते हुए लागत को project costing में शामिल करना होगा।

नई फ्लीट में Electric और CNG वाहनों पर जोर

Contractor को जरूरत के अनुसार नई auto tippers, e-rickshaws और अन्य collection vehicles की खरीद करनी होगी। RFP में नई fleet को मुख्य रूप से electric या CNG आधारित रखने पर जोर दिया गया है। Diesel या petrol vehicles का उपयोग तभी किया जा सकेगा जब electric/CNG infrastructure उपलब्ध न हो और PMC इसकी अनुमति दे।

E-rickshaw में wet और dry waste के लिए अलग compartments, कम-से-कम 500 किलो payload, कम-से-कम 60 किलोमीटर प्रति charge range, GPS/GSM tracker, weather-proof cabin, fire extinguisher और first-aid kit जैसी specifications निर्धारित हैं।

GPS, RFID और MIS से होगी निगरानी

पूरी व्यवस्था को technology-enabled बनाने के लिए contractor को GPS, RFID और MIS आधारित monitoring system लागू करना होगा। इसके माध्यम से vehicles, routes, manpower deployment, attendance, household coverage, source segregation, vehicle trips और operational performance की निगरानी की जाएगी।

RFP में RFID आधारित monitoring का भी प्रावधान है। उदाहरण के तौर पर 1,000 units वाले cluster में करीब 50 RFID tags की आवश्यकता का उदाहरण दिया गया है।

24 घंटे में शिकायत दूर करने का लक्ष्य

चयनित एजेंसी को कम-से-कम एक dedicated Complaint Redressal Centre स्थापित करना होगा। इसमें online, telephone, written और personal complaint registration की सुविधा होगी। Centre में कम-से-कम तीन dedicated phone lines होंगी और यह सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक, सप्ताह के सातों दिन संचालित होगा।

दर्ज शिकायतों को उसी दिन MIS में दर्ज कर 24 घंटे के भीतर समाधान करने का लक्ष्य रखा गया है।

जागरूकता अभियान भी contractor की जिम्मेदारी

Contractor को लोगों के बीच waste segregation और स्वच्छता को लेकर IEC activities भी चलानी होंगी। इसमें newspaper, hoardings, radio, TV, street plays, pamphlets, school campaigns और RWA training शामिल हैं।

RWA training कम-से-कम महीने में एक बार करनी होगी, जबकि schools में clean-up drive हर छह महीने में आयोजित करनी होगी। कचरा संग्रहण वाहनों में awareness jingles के लिए speakers लगाने का भी प्रावधान है।

₹270 करोड़ औसत टर्नओवर वाले bidder ही ले सकेंगे हिस्सा

टेंडर में भाग लेने के लिए bidder के पास पिछले 10 वर्षों में भारत में कम-से-कम चार वर्षों का successful MSW collection and transportation experience होना चाहिए। इसके तहत एक 1,040 TPD project, या दो 650 TPD projects, या तीन 520 TPD projects का अनुभव मांगा गया है।

साथ ही road sweeping, drain cleaning, facility management या mechanised cleaning से संबंधित कम-से-कम चार वर्षों का अनुभव भी जरूरी है।

Financial eligibility के तहत FY 2022-23, 2023-24 और 2024-25 में bidder का minimum average annual turnover ₹270 करोड़, 31 मार्च 2026 को positive net worth और ₹556 करोड़ की एक साल की bank solvency जरूरी है।

150 दिनों में 100% डोर-टू-डोर कलेक्शन

Project implementation में contractor को तय समय के भीतर पूरी व्यवस्था खड़ी करनी होगी। GPS installation 60 दिनों में, RFID rollout 180 दिनों में और 100% D2D collection 150 दिनों के भीतर हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। Complaint centre commencement से पहले स्थापित करना होगा।

RFP में Commercial Operations Date को LOA जारी होने के 30 दिन बाद शुरू होने वाली D2D collection, segregation और transportation services से जोड़ा गया है।

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