बिहार में इको-टूरिज्म के समग्र विकास को लेकर राज्य सरकार ने कार्ययोजना पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 16 अगस्त 2026 को पटना स्थित संकल्प सभागार में बिहार में इको-टूरिज्म के विकास को लेकर समीक्षा बैठक की। बैठक में राज्य के प्राकृतिक एवं वन क्षेत्रों, जलाशयों, पहाड़ी क्षेत्रों और अन्य पर्यटन स्थलों को विकसित करने की योजना पर चर्चा हुई।
PPP मॉडल से विकसित होंगी इको-टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म परियोजनाएं
राज्य में इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म और वाटर स्पोर्ट्स से जुड़ी परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए PPP मॉडल के माध्यम से काम करने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही बिहार में इको-टूरिज्म की ब्रांडिंग और स्ट्रैटेजिक प्रमोशन पर भी ध्यान देने की बात कही गई है।
प्राकृतिक एवं वन क्षेत्रों, जलाशयों, पहाड़ी क्षेत्रों और अन्य पर्यटन स्थलों के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार कर विकास कार्य किए जाएंगे। विभिन्न प्राकृतिक स्थलों और जलाशयों पर वेलनेस सेंटर, हॉट स्प्रिंग, सफारी, एडवेंचर स्पोर्ट्स, योग ग्राम, पिकनिक स्पॉट, स्विमिंग पूल, फ्लोटिंग ब्रिज, हेलीपैड, कल्चरल प्रोग्राम और कल्चरल कैंप जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पर्यटकों के लिए ट्रैकिंग रूट, बेसिक माउंटेनियरिंग और रॉक क्लाइंबिंग जैसी साहसिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार पर रहेगा फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में इको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए उनका पर्यटन की दृष्टि से बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए। इको-टूरिज्म के विकास से पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इको-टूरिज्म की योजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदाय की भागीदारी, रोजगार सृजन और पर्यटकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। वन, सिंचाई और पर्यटन सहित संबंधित विभाग आपसी समन्वय से काम करते हुए बिहार के प्राकृतिक स्थलों को आकर्षक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करें।
पर्यटन स्थलों की व्यापक ब्रांडिंग के साथ देश-विदेश के पर्यटकों को बिहार की प्राकृतिक और साहसिक पर्यटन संभावनाओं से परिचित कराने के लिए कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है। जिन प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्थलों का वर्तमान में अपेक्षित विकास नहीं हुआ है, उनकी क्षमता का आकलन कर चरणबद्ध तरीके से विकास किया जाएगा।



