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- पहले चरण में तीन प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ा गया
- सप्ताहांत में संचालित होंगी सभी उड़ानें
- टिकट किराया तय, पर्यटन पैकेज खरीदना होगा अनिवार्य
- हर महीने ₹84 लाख से अधिक खर्च, आय से कहीं अधिक होगी सरकारी सहायता
- छह महीने के लिए ₹4.35 करोड़ तक VGF का अनुमान
- विभिन्न विभागों को सौंपी गई स्पष्ट जिम्मेदारियां
- विकास आयुक्त की अध्यक्षता में होगी निगरानी
- छह महीने बाद होगी योजना की समीक्षा
बिहार सरकार ने राज्य में धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन को नई दिशा देने के उद्देश्य से “मुख्यमंत्री बिहार हेली-टूरिज्म एवं एयर टूरिज्म सेवा योजना, 2026” लागू कर दी है। इस योजना को 17 जून 2026 को मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिलने के बाद 8 जुलाई 2026 को राजपत्र में प्रकाशित किया गया। योजना का पहला चरण 15 जुलाई 2026 से शुरू होकर 15 जनवरी 2027 तक छह महीने के लिए संचालित किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य व्यावसायिक लाभ अर्जित करना नहीं, बल्कि बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक तेज, सुविधाजनक और आरामदायक हवाई संपर्क उपलब्ध कराना है।
पहले चरण में तीन प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ा गया
योजना के प्रथम चरण में पश्चिम चंपारण का वाल्मीकिनगर, नालंदा का राजगीर तथा कैमूर जिले का मां मुंडेश्वरी मंदिर शामिल किया गया है। इन तीनों पर्यटन स्थलों को पटना से नियमित हवाई सेवा के माध्यम से जोड़ा जाएगा। वाल्मीकिनगर के लिए राज्य सरकार के विमान का उपयोग किया जाएगा, जबकि राजगीर और कैमूर के लिए 6+2 सीटर चार्टर्ड हेलीकॉप्टर की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक उड़ान में अधिकतम पांच यात्रियों के लिए सीटें उपलब्ध रहेंगी।
| पर्यटन स्थल | जिला | सेवा का प्रकार |
|---|---|---|
| वाल्मीकिनगर | पश्चिम चंपारण | राज्य सरकार का विमान |
| राजगीर | नालंदा | चार्टर्ड हेलीकॉप्टर |
| मां मुंडेश्वरी मंदिर | कैमूर | चार्टर्ड हेलीकॉप्टर |
यात्रियों को केवल एक सॉफ्ट हैंडबैग ले जाने की अनुमति होगी, जिसका अधिकतम वजन 3 से 4 किलोग्राम तथा आकार 22×11×7 इंच निर्धारित किया गया है।
सप्ताहांत में संचालित होंगी सभी उड़ानें
योजना के तहत सभी एयर और हेली-टूरिज्म सेवाएं प्रत्येक शनिवार और रविवार को संचालित होंगी। पटना से वाल्मीकिनगर के लिए सुबह 10 बजे तथा दोपहर 3 बजे उड़ानें संचालित होंगी, जबकि वापसी की उड़ानें सुबह 11 बजे और शाम 4:30 बजे होंगी। इस रूट पर सप्ताह में दोनों दिशाओं में कुल 20-20 सीटें उपलब्ध रहेंगी।
इसी प्रकार पटना से राजगीर के लिए सुबह 9:30 बजे हेलीकॉप्टर उड़ान भरेगा और राजगीर से सुबह 10:30 बजे वापसी करेगा। पटना से कैमूर (करमचट डैम हेलीपैड) के लिए सुबह 11 बजे उड़ान निर्धारित की गई है, जबकि कैमूर से दोपहर 12:45 बजे वापसी होगी। दोनों रूटों पर सप्ताह में प्रत्येक दिशा में 10-10 सीटें उपलब्ध कराई जाएंगी।
इसके अलावा पटना शहर के ऊपर 10 मिनट की हेलीकॉप्टर जॉय राइड भी शुरू की जाएगी। यह सेवा प्रत्येक शनिवार और रविवार को दोपहर 3 बजे से शुरू होगी। हर 30 मिनट पर एक उड़ान संचालित होगी और प्रतिदिन कुल चार जॉय राइड उपलब्ध रहेंगी। प्रत्येक राइड में अधिकतम पांच यात्री यात्रा कर सकेंगे।
टिकट किराया तय, पर्यटन पैकेज खरीदना होगा अनिवार्य
पर्यटन विभाग ने सभी रूटों के लिए किराया भी निर्धारित कर दिया है। पटना-वाल्मीकिनगर रूट के लिए ₹5,000, पटना-राजगीर के लिए ₹4,000 और पटना-कैमूर के लिए ₹6,000 प्रति यात्री किराया तय किया गया है। पटना हेलीकॉप्टर जॉय राइड के लिए प्रति सीट ₹2,100 शुल्क निर्धारित किया गया है।
| रूट | प्रति यात्री किराया |
|---|---|
| पटना – वाल्मीकिनगर | ₹5,000 |
| वाल्मीकिनगर – पटना | ₹5,000 |
| पटना – राजगीर | ₹4,000 |
| राजगीर – पटना | ₹4,000 |
| पटना – कैमूर | ₹6,000 |
| कैमूर – पटना | ₹6,000 |
| पटना हेलीकॉप्टर जॉय राइड (10 मिनट) | ₹2,100 |
हालांकि केवल टिकट खरीदकर यात्रा नहीं की जा सकेगी। योजना के तहत प्रत्येक यात्री के लिए संबंधित पर्यटन पैकेज खरीदना अनिवार्य किया गया है। सभी टिकटों की बुकिंग बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम (BSTDC) के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होगी और भुगतान नेट बैंकिंग, यूपीआई, डेबिट कार्ड तथा क्रेडिट कार्ड सहित विभिन्न डिजिटल माध्यमों से किया जा सकेगा। मौसम, तकनीकी खराबी या अन्य अपरिहार्य परिस्थितियों में उड़ान रद्द होने पर यात्रियों को पूरा किराया वापस किया जाएगा।
हर महीने ₹84 लाख से अधिक खर्च, आय से कहीं अधिक होगी सरकारी सहायता
योजना के वित्तीय आकलन से स्पष्ट है कि इसे व्यावसायिक परियोजना के रूप में नहीं बल्कि पर्यटन प्रोत्साहन योजना के रूप में संचालित किया जाएगा। नागरिक उड्डयन विभाग ने 6+2 सीटर हेलीकॉप्टर M/s Sailandan Aviation Private Limited से वेट लीज पर लिया है, जिसके लिए ₹87 लाख प्रतिमाह तथा 18 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान किया जाएगा। हेलीकॉप्टर उड़ानों के लिए ₹99,000 प्रति फ्लाइट आवर की दर निर्धारित की गई है।
पर्यटन विकास निगम द्वारा डी-हायरिंग शुल्क, हेलीकॉप्टर संचालन और राज्य सरकार के विमान के संचालन पर कुल मिलाकर लगभग ₹84.10 लाख प्रतिमाह खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।
| मद | अनुमानित राशि |
|---|---|
| कुल मासिक संचालन व्यय | ₹84.10 लाख |
| 100% सीट अधिभोग पर अनुमानित आय | ₹19.36 लाख |
| मासिक VGF आवश्यकता | ₹64.74 लाख |
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि योजना का संचालन राजस्व कमाने के उद्देश्य से नहीं किया जा रहा है। यदि सभी सीटें पूरी तरह भर भी जाती हैं, तब भी टिकटों से होने वाली आय कुल संचालन व्यय का केवल एक हिस्सा ही पूरा कर पाएगी। शेष राशि सरकार वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) के माध्यम से उपलब्ध कराएगी, ताकि पर्यटन और क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा दिया जा सके।
छह महीने के लिए ₹4.35 करोड़ तक VGF का अनुमान
सरकार ने योजना के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग का भी विस्तृत आकलन तैयार किया है। यदि सभी उड़ानों में 100 प्रतिशत सीटें भरती हैं, तो छह माह के लिए लगभग ₹3.88 करोड़ की सरकारी सहायता की आवश्यकता होगी। वहीं यदि औसत सीट अधिभोग 60 प्रतिशत रहता है, तो यह राशि बढ़कर लगभग ₹4.35 करोड़ तक पहुंच सकती है।
| औसत सीट अधिभोग | छह माह के लिए अनुमानित VGF |
|---|---|
| 100% | ₹3.88 करोड़ |
| 60% | ₹4.35 करोड़ |
यह दर्शाता है कि योजना की सफलता का मूल्यांकन केवल आय के आधार पर नहीं किया जाएगा, बल्कि पर्यटन वृद्धि, क्षेत्रीय संपर्क और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों पर इसके प्रभाव को भी प्रमुख आधार बनाया जाएगा।
विभिन्न विभागों को सौंपी गई स्पष्ट जिम्मेदारियां
योजना के सफल संचालन के लिए अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं। नागरिक उड्डयन विभाग उड़ानों का संचालन, विमान एवं हेलीकॉप्टर का रखरखाव, पायलट एवं तकनीकी कर्मचारियों की व्यवस्था, सुरक्षा मानकों का पालन, ईंधन, लॉजिस्टिक्स तथा मां मुंडेश्वरी मंदिर के निकट हेलीपैड और अन्य आधारभूत संरचना के विकास का कार्य करेगा।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग वाल्मीकिनगर के लिए पर्यटन पैकेज तैयार करेगा। संबंधित जिला प्रशासन हेलीपैड सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, अग्निशमन एवं आपदा प्रबंधन, स्थानीय समन्वय तथा आवश्यक अनुमति सुनिश्चित करेगा। बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम ऑनलाइन टिकटिंग, डिजिटल भुगतान, टिकट रद्दीकरण एवं रिफंड, प्रचार-प्रसार, पर्यटन पैकेज, पर्यटक समन्वय और हेल्पलाइन का संचालन करेगा।
विकास आयुक्त की अध्यक्षता में होगी निगरानी
योजना की निगरानी के लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय संचालन एवं निगरानी समिति का गठन किया जाएगा। समिति में पर्यटन विभाग, नागरिक उड्डयन विभाग, भवन निर्माण विभाग, गृह विभाग तथा संबंधित जिलों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति योजना के संचालन, वित्तीय प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था तथा यात्रियों की संतुष्टि की नियमित समीक्षा करेगी।
छह महीने बाद होगी योजना की समीक्षा
सरकार ने अधिसूचना में यह भी प्रावधान किया है कि पहले छह माह के संचालन के बाद योजना की समीक्षा की जाएगी। समीक्षा के आधार पर नए पर्यटन स्थलों को जोड़ा जा सकता है, किराए में संशोधन किया जा सकता है, उड़ानों की संख्या बढ़ाई या घटाई जा सकती है तथा आवश्यकता पड़ने पर योजना की अवधि भी बढ़ाई जा सकती है।
इसके अलावा यदि किसी निर्धारित उड़ान में सीट बुकिंग 60 प्रतिशत से कम रहती है या अन्य अपरिहार्य परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं, तो बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम उड़ान रद्द कर सकेगा। ऐसी स्थिति में यात्रियों को टिकट का पूरा पैसा वापस किया जाएगा।



