In This Article
- बिहार को पूर्वी भारत का MSME हब बनाने की तैयारी
- एक करोड़ MSME, एक करोड़ रोजगार और टेक्नोलॉजी सेंटर का लक्ष्य
- उद्यमियों के लिए नया इकोसिस्टम और कारोबार सुगमता पर जोर
- वित्त, निर्यात और औद्योगिक अवसंरचना को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन
- ₹10 करोड़ तक के प्रोत्साहन सहित व्यापक वित्तीय सहायता
- हरित उद्योग और मजबूत निगरानी व्यवस्था पर भी फोकस
बिहार सरकार ने राज्य को पूर्वी भारत का अग्रणी औद्योगिक और उद्यमिता केंद्र बनाने के उद्देश्य से ड्राफ्ट बिहार MSME नीति 2026 जारी की है। नई नीति में अगले पांच वर्षों के दौरान सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को व्यापक वित्तीय सहायता, आधुनिक औद्योगिक अवसंरचना, तकनीकी उन्नयन, निर्यात प्रोत्साहन और कारोबार सुगमता (Ease of Doing Business) उपलब्ध कराने का रोडमैप तैयार किया गया है। सरकार का लक्ष्य राज्य में उद्यमिता को गांव-गांव तक पहुंचाना, स्थानीय रोजगार बढ़ाना और बिहार को राष्ट्रीय एवं वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण केंद्र बनाना है।
नई नीति केवल सब्सिडी तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्यम स्थापित करने से लेकर वित्त, कौशल विकास, बाजार, निर्यात, डिजिटल सेवाओं, क्लस्टर विकास और हरित औद्योगिकीकरण तक MSME के पूरे जीवनचक्र को कवर करती है। राज्य सरकार का मानना है कि बिहार की तेज आर्थिक वृद्धि, बड़ी युवा आबादी, कृषि आधारित संसाधन और बेहतर होती सड़क, रेल एवं जलमार्ग कनेक्टिविटी औद्योगिक विस्तार के लिए मजबूत आधार तैयार कर चुके हैं। ऐसे में MSME क्षेत्र को राज्य की आर्थिक प्रगति का सबसे बड़ा इंजन बनाने की रणनीति अपनाई गई है।
बिहार को पूर्वी भारत का MSME हब बनाने की तैयारी
ड्राफ्ट नीति का उद्देश्य बिहार को निवेश, विनिर्माण और उद्यमिता के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करना है। सरकार ने “एक परिवार-एक उद्यम” का विजन अपनाते हुए प्रत्येक परिवार तक उद्यमिता की पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है। महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, दिव्यांग, ट्रांसजेंडर उद्यमियों, स्टार्टअप तथा पिछड़े क्षेत्रों में स्थापित होने वाले उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव किया गया है। नीति अधिसूचना की तिथि से पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगी तथा पूरे बिहार में नए उद्योगों और विस्तार करने वाली मौजूदा इकाइयों पर लागू होगी। इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित संशोधित MSME वर्गीकरण को अपनाया गया है, जिसमें निवेश और वार्षिक कारोबार दोनों के आधार पर उद्यमों का वर्गीकरण किया जाएगा।
एक करोड़ MSME, एक करोड़ रोजगार और टेक्नोलॉजी सेंटर का लक्ष्य
सरकार ने नीति के तहत एक करोड़ MSME इकाइयों का औपचारिककरण और एक करोड़ से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अलावा 500 से अधिक MSME इकाइयों को ग्लोबल वैल्यू चेन से जोड़ने, कोशी, भागलपुर, मुंगेर और पूर्णिया में चार टेक्नोलॉजी एवं एक्सटेंशन सेंटर स्थापित करने तथा प्रत्येक वर्ष एक लाख MSME को इंडस्ट्री 4.0 और सेक्टर-विशिष्ट औद्योगिक प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे बिहार के उद्योग राष्ट्रीय और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होंगे तथा स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
उद्यमियों के लिए नया इकोसिस्टम और कारोबार सुगमता पर जोर
नई नीति के तहत प्रत्येक जिले में MSME केंद्र स्थापित किए जाएंगे तथा ब्लॉक स्तर तक MSME मित्र तैनात होंगे, जो उद्यमियों को पंजीकरण, ऋण, प्रशिक्षण, प्रमाणन और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में सहायता करेंगे। पंचायत स्तर पर उद्योग सलाहकार नियुक्त किए जाएंगे ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा मिल सके। राज्य सरकार MSME के लिए हेल्पलाइन, टोल-फ्री नंबर, चैटबॉट और एकीकृत डिजिटल पोर्टल एवं मोबाइल एप विकसित करेगी, जिससे सभी सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध होंगी।
नीति में बिहार MSME डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के गठन का प्रस्ताव भी रखा गया है, जो राज्य और केंद्र सरकार की MSME योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रमुख एजेंसी होगा। पटलीपुत्र स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट (IED) को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा और इसके विस्तार केंद्र सभी जिलों में स्थापित होंगे। प्रत्येक जिले में चार्टर्ड अकाउंटेंट और कानूनी सलाहकारों का पैनल तैयार किया जाएगा, जबकि MSME के भुगतान संबंधी विवादों के त्वरित समाधान के लिए प्रमंडल स्तर पर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइज फैसिलिटेशन काउंसिल (MSEFC) गठित किए जाएंगे। उद्योगों के लिए बीमा कवरेज को भी बढ़ावा दिया जाएगा ताकि प्राकृतिक आपदाओं और अन्य जोखिमों से व्यवसाय सुरक्षित रह सके।
स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए हैकाथॉन, स्टार्टअप अभियान, रैपिड प्रोटोटाइपिंग लैब, स्टार्टअप सेल और बी-हब विकसित किए जाएंगे। एक डिजिटल सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्टार्टअप्स को सरकारी योजनाओं, निवेशकों, मेंटर और नियामकीय सहायता तक आसान पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी। स्कूलों और विश्वविद्यालयों में उद्यमिता आधारित पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे ताकि युवाओं में उद्यमिता की संस्कृति विकसित हो सके।
वित्त, निर्यात और औद्योगिक अवसंरचना को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन
MSME की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार CGTMSE के साथ ₹100 करोड़ का कॉर्पस बनाएगी, जिससे बिना अतिरिक्त जमानत के ऋण उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। TReDS प्लेटफॉर्म के माध्यम से MSME को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। बंद और बीमार उद्योगों के पुनर्जीवन के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी, जबकि नियमित उद्यमी पंचायत, जिला स्तरीय समीक्षा बैठकें और RBI के सहयोग से राज्य स्तरीय अंतर-संस्थागत समिति गठित कर उद्योगों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। पिछड़े जिलों में स्थापित होने वाले उद्योगों को अतिरिक्त 5 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी भी दी जाएगी।
निर्यात को बढ़ावा देने के लिए उद्योग विभाग में समर्पित एक्सपोर्ट सेल स्थापित किया जाएगा तथा संभावित निर्यातकों को एक्सपोर्ट चैंपियन के रूप में विकसित किया जाएगा। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के साथ समन्वय बढ़ाया जाएगा, नियमित बायर-सेलर मीट आयोजित होंगी और पटलीपुत्र औद्योगिक क्षेत्र में MSME स्टूडियो स्थापित किया जाएगा, जहां उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग, फोटोग्राफी, डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार आयातित उत्पादों की पहचान कर उनके स्थानीय उत्पादन को भी बढ़ावा देगी।
सरकारी खरीद में स्थानीय उद्योगों को प्राथमिकता देने के लिए बिहार परचेज प्रेफरेंस पॉलिसी 2024 को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। राज्य सरकार स्थानीय MSME, स्टार्टअप और छोटे उद्योगों से खरीद बढ़ाएगी। इसके साथ ही SC/ST एवं अन्य वंचित वर्गों के स्वामित्व वाले MSE से न्यूनतम 4 प्रतिशत तथा महिला स्वामित्व वाले MSE से न्यूनतम 3 प्रतिशत सरकारी खरीद सुनिश्चित करने का प्रस्ताव रखा गया है। वेंडर डेवलपमेंट कार्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे ताकि स्थानीय उद्योगों को बड़े बाजार उपलब्ध हो सकें।
औद्योगिक अवसंरचना को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री इंटीग्रेटेड क्लस्टर डेवलपमेंट स्कीम (CM-ICDS) शुरू की जाएगी। इसके तहत प्रत्येक जिले में चरणबद्ध तरीके से नैनो और मेगा MSME पार्क विकसित होंगे, जिनमें प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। पारंपरिक उद्योगों के लिए हेरिटेज क्लस्टर, परीक्षण प्रयोगशालाएं और कच्चा माल बैंक विकसित किए जाएंगे। सभी औद्योगिक क्लस्टरों को PM गति शक्ति पोर्टल और GIS मैपिंग से जोड़ा जाएगा ताकि बेहतर योजना और संतुलित औद्योगिक विकास सुनिश्चित किया जा सके।
₹10 करोड़ तक के प्रोत्साहन सहित व्यापक वित्तीय सहायता
ड्राफ्ट नीति के तहत पात्र उद्योगों को श्रेणी और जिले के आधार पर 30 प्रतिशत तक पूंजी सब्सिडी दी जाएगी। महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर उद्यमियों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त पूंजी सब्सिडी मिलेगी, जबकि विस्तार कर उच्च श्रेणी में पहुंचने वाले उद्योगों को अतिरिक्त 5 प्रतिशत स्केलिंग-अप प्रोत्साहन दिया जाएगा। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसी पात्र परियोजना को अधिकतम ₹10 करोड़ तक की वित्तीय सहायता मिल सकती है।
सरकार उत्पादन शुरू होने के बाद पहले तीन वर्षों तक पात्र इकाइयों के कर्मचारियों के EPF में नियोक्ता अंशदान की प्रतिपूर्ति करेगी। पहले तीन वर्षों तक बिजली शुल्क पर 20 प्रतिशत सब्सिडी, रूफटॉप सोलर संयंत्र पर 25 प्रतिशत सहायता, ऊर्जा एवं जल ऑडिट की लागत का 75 प्रतिशत प्रतिपूर्ति, नई विनिर्माण इकाइयों के लिए स्टाम्प ड्यूटी की 100 प्रतिशत वापसी, गुणवत्ता प्रमाणन, पेटेंट, ट्रेडमार्क, ई-कॉमर्स अपनाने और SME एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने पर भी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा छह वर्षों तक नेट SGST का 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति, निर्यात प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन, बंद उद्योगों के पुनर्जीवन पैकेज, उभरते उद्योगों के लिए विशेष सहायता तथा निजी MSME पार्क और हेरिटेज क्लस्टर विकास के लिए भी वित्तीय प्रावधान किए गए हैं।
हरित उद्योग और मजबूत निगरानी व्यवस्था पर भी फोकस
नीति में पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए ऊर्जा दक्षता, रूफटॉप सोलर, जल संरक्षण, ऊर्जा एवं जल ऑडिट तथा सर्कुलर इकोनॉमी आधारित औद्योगिक मॉडल को प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार MSME क्लस्टरों का ऊर्जा मानचित्रण करेगी और उद्योगों में आधुनिक तकनीक तथा डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देगी।
नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उद्योग विभाग के MSME निदेशालय को सौंपी जाएगी, जबकि बिहार MSME डेवलपमेंट कॉरपोरेशन विभिन्न योजनाओं के संचालन में प्रमुख भूमिका निभाएगा। राज्य स्तरीय सशक्त समिति और राज्य स्तरीय समीक्षा एवं निगरानी समिति नियमित रूप से नीति की प्रगति की समीक्षा करेंगी और आवश्यकता अनुसार सुधार की अनुशंसा करेंगी। सरकार का विश्वास है कि यह नीति बिहार में निवेश, रोजगार, विनिर्माण और उद्यमिता को नई दिशा देते हुए राज्य को पूर्वी भारत के प्रमुख MSME हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।




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