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तारापुर में पर्यटन और धार्मिक अवसंरचना विकास को मिली मंजूरी
बिहार मंत्रिपरिषद ने मुंगेर जिले के तारापुर में सांस्कृतिक, धार्मिक एवं पर्यटकीय सुविधाओं के विकास के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत मौजा-गाजीपुर, थाना संख्या-191, जमाबंदी संख्या-289 की 15.01 एकड़ भूमि ईशा फाउंडेशन, ईशा योग केंद्र, वेल्लियांगिरी फुटहिल, कोयंबटूर, तमिलनाडु को 1 रुपये के टोकन मूल्य पर 99 वर्ष के लिए लीज पर देने की स्वीकृति प्रदान की गई है।
इस संबंध में प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (MoU) के प्रारूप को भी मंजूरी दी गई है।
विशेष प्रावधानों में शिथिलता देकर दी गई स्वीकृति
सरकार ने यह स्वीकृति राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार के पत्रांक 644 दिनांक 15 जून 1999 की कंडिका-05 तथा बिहार खासमहल नीति, 2011 की कंडिका-1 एवं कंडिका-4(ङ) में वर्णित प्रावधानों को शिथिल करते हुए प्रदान की है।
भूमि का उपयोग तारापुर क्षेत्र में सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों से संबंधित आधुनिक सुविधाओं के विकास के लिए किया जाएगा।
शिव परिपथ और कांवरिया पथ का महत्वपूर्ण केंद्र है तारापुर
सरकारी दस्तावेज के अनुसार, तारापुर प्राचीन अंग जनपद का हिस्सा रहा है और पौराणिक तथा ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। यह मुंगेर शिव परिपथ के प्रमुख केंद्रों में शामिल है और कांवरिया पथ पर स्थित है।
प्रत्येक वर्ष विशेषकर श्रावण मास में लाखों श्रद्धालु और कांवरिया सुल्तानगंज से देवघर तक जलाभिषेक के लिए इसी मार्ग से यात्रा करते हैं।
आधुनिक पर्यटन एवं सांस्कृतिक सुविधाओं का होगा विकास
राज्य सरकार ने माना है कि मुंगेर जिला राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान रखता है। ऐसे में धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों के आयोजन के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक समेकित सांस्कृतिक, धार्मिक एवं पर्यटकीय स्थल की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
प्रस्तावित परियोजना के माध्यम से तारापुर में ऐसी सुविधाओं का विकास किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और आगंतुकों के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा प्रोत्साहन
तारापुर में प्रस्तावित सांस्कृतिक, धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के विकास से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना है। साथ ही क्षेत्र में आगंतुकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है।
सरकार के अनुसार, इस परियोजना के लिए 15.01 एकड़ भूमि को 1 रुपये के टोकन मूल्य पर 99 वर्षों की लीज अवधि के लिए ईशा फाउंडेशन को उपलब्ध कराया जाएगा।



