Monday, 22 June 2026
Patna
Bihar Infra Tales

भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य में विकसित होगा ₹162 करोड़ का इको-टूरिज्म सर्किट

Share this article: X Facebook Telegram
Bhimbandh Eco Tourism Project
In This Article
  1. 681 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को जोड़कर विकसित होगा पर्यटन सर्किट
  2. वॉटर स्पोर्ट्स और इको-रिसॉर्ट बनेंगे प्रमुख आकर्षण
  3. एडवेंचर टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
  4. फिश थेरेपी सेंटर और नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर भी प्रस्तावित
  5. PPP मॉडल पर होगा विकास
  6. प्राकृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए होगा विकास

बिहार के प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में शामिल भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य को एक बड़े इको-टूरिज्म गंतव्य के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत बिहार इको टूरिज्म डेवलपमेंट सोसाइटी (BETDS) ने लगभग ₹162 करोड़ की परियोजना पर काम आगे बढ़ाया है।

Bhimbandh Eco Tourism Project का उद्देश्य क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा, वन्यजीवों और पर्यटन क्षमता का बेहतर उपयोग करना है। परियोजना के तहत आधुनिक पर्यटन सुविधाओं के साथ प्रकृति आधारित गतिविधियों का विकास किया जाएगा।

681 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को जोड़कर विकसित होगा पर्यटन सर्किट

भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य लगभग 681 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह क्षेत्र मुंगेर, लखीसराय और जमुई जिलों तक विस्तारित है।

परियोजना के तहत भीमबांध, कुकुरझाप और खड़गपुर झील को जोड़ते हुए एक एकीकृत इको-टूरिज्म सर्किट विकसित किया जाएगा। इसके अलावा खड़गपुर झील को वॉटर स्पोर्ट्स और एडवेंचर गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।

वॉटर स्पोर्ट्स और इको-रिसॉर्ट बनेंगे प्रमुख आकर्षण

परियोजना में पर्यटकों के लिए कई नई सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनमें वॉटर स्पोर्ट्स गतिविधियां, इको-रिसॉर्ट, पर्यटक कॉटेज और प्रशासनिक सुविधाएं शामिल हैं।

इसके अलावा माउंटेन डेक, व्यू पॉइंट, चाय स्टॉल और बच्चों के लिए मनोरंजन क्षेत्र भी विकसित किए जाएंगे। इन सुविधाओं का उद्देश्य पर्यटकों के ठहराव और अनुभव को बेहतर बनाना है।

एडवेंचर टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा

परियोजना में एडवेंचर टूरिज्म पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत दो-तरफा जिपलाइन जैसी गतिविधियों का विकास प्रस्तावित है।

वहीं प्रकृति प्रेमियों के लिए ट्रेकिंग मार्ग और खुले मनोरंजन क्षेत्र भी तैयार किए जाएंगे। इसके परिणामस्वरूप भीमबांध को एडवेंचर और इको-टूरिज्म दोनों श्रेणियों में नई पहचान मिल सकती है।

फिश थेरेपी सेंटर और नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर भी प्रस्तावित

परियोजना के तहत भावराकोल क्षेत्र में फिश थेरेपी सेंटर विकसित करने की योजना बनाई गई है। साथ ही नेचर एवं वाइल्डलाइफ इंटरप्रिटेशन सेंटर भी स्थापित किए जाएंगे।

इन केंद्रों के माध्यम से पर्यटकों को क्षेत्र की जैव विविधता, वन्यजीवों और प्राकृतिक विरासत की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा प्रकृति शिक्षा और जागरूकता को भी बढ़ावा मिलेगा।

PPP मॉडल पर होगा विकास

परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। चयनित डेवलपर डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगा।

दस्तावेजों के अनुसार, परियोजना के लिए 25 वर्षों की रियायत अवधि निर्धारित की गई है। इसके साथ Viability Gap Funding (VGF) का भी प्रावधान किया गया है, ताकि परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता सुनिश्चित की जा सके।

प्राकृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए होगा विकास

भीमबांध अपने प्राकृतिक गर्म जलस्रोतों, घने जंगलों, वन्यजीवों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। परियोजना का लक्ष्य आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विकास करना है, जबकि क्षेत्र की पारिस्थितिकी और प्राकृतिक पहचान को सुरक्षित रखा जाएगा।

उल्लेखनीय है कि यह परियोजना बिहार में इको-टूरिज्म और प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

अपनी राय दें