Thursday, 2 July 2026
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बिहार विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए नई नियमावली लागू, अब लिखित परीक्षा और इंटरव्यू से होगा चयन

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In This Article
  1. भर्ती प्रक्रिया कैसे होगी?
  2. आवेदन के लिए क्या होगी शैक्षणिक योग्यता?
  3. NET, SLET और SET होंगे अनिवार्य
  4. किन पीएचडी धारकों को मिलेगी NET से छूट?
  5. विशेष विषयों के लिए अलग प्रावधान
  6. आयु सीमा क्या होगी?
  7. 200 अंकों की होगी पूरी चयन प्रक्रिया
  8. ऐसा होगा लिखित परीक्षा का पैटर्न
  9. इंटरव्यू के लिए न्यूनतम कितने अंक जरूरी होंगे?
  10. मेरिट सूची कैसे तैयार होगी?
  11. साक्षात्कार बोर्ड का गठन कैसे होगा?
  12. संविदा असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति कब होगी?
  13. संविदा नियुक्ति में API स्कोर के आधार पर होगा चयन
  14. स्नातकोत्तर अंकों का वेटेज
  15. स्नातक, इंटरमीडिएट और मैट्रिक के अंक भी जुड़ेंगे
  16. संविदा नियुक्ति में साक्षात्कार
  17. आरक्षण के क्या होंगे नियम?
  18. नियुक्ति की प्रक्रिया
  19. वेतनमान
  20. जॉइनिंग से जुड़े नियम
  21. नई नियमावली के प्रमुख प्रावधान

बिहार के राज्य विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति प्रक्रिया में व्यापक बदलाव करते हुए राज्यपाल सचिवालय ने “बिहार विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों (संविदा सहित) की नियुक्ति संबंधी अधिनियम, 2026” अधिसूचित कर दिया है। यह नियमावली राज्यपाल द्वारा विश्वविद्यालयों के कुलपतियों तथा बिहार राज्य उच्च शिक्षा परिषद से परामर्श के बाद स्वीकृत की गई है।

नई नियमावली बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976, पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 तथा राज्य के अन्य विश्वविद्यालय अधिनियमों के अंतर्गत आने वाले सभी राज्य विश्वविद्यालयों और उनके अंगीभूत महाविद्यालयों पर लागू होगी। अब नियमित और संविदा दोनों प्रकार के असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति इसी नियमावली के अनुसार की जाएगी।

नियमावली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विश्वविद्यालयों में नियुक्त होने वाले अभ्यर्थियों के पास विषय का पर्याप्त ज्ञान, प्रभावी अध्यापन क्षमता, शोध कार्य करने की योग्यता, विद्यार्थियों को प्रेरित करने का कौशल तथा आधुनिक शिक्षण तकनीकों के उपयोग की क्षमता हो। साथ ही अभ्यर्थियों के पास विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक योग्यताएं भी होना आवश्यक होगा।

भर्ती प्रक्रिया कैसे होगी?

नियमित असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति अखिल भारतीय स्तर पर जारी होने वाले विज्ञापन के माध्यम से की जाएगी। भर्ती की पूरी प्रक्रिया बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) द्वारा संचालित की जाएगी।

विश्वविद्यालय अपने-अपने विषयों की रिक्तियों का निर्धारण करेंगे और उन्हें उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से आयोग को भेजेंगे। आयोग प्राप्त अधियाचन के आधार पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करेगा तथा नियुक्तियां उसी प्राथमिकता के अनुसार की जाएंगी जिस क्रम में अधियाचन प्राप्त होगा।

आवेदन के लिए क्या होगी शैक्षणिक योग्यता?

अभ्यर्थी के पास संबंधित विषय में किसी भारतीय विश्वविद्यालय से कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर उपाधि अथवा किसी मान्यता प्राप्त विदेशी विश्वविद्यालय से समकक्ष डिग्री होना अनिवार्य होगा।

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग (नॉन-क्रीमी लेयर), पिछड़ा वर्ग (नॉन-क्रीमी लेयर) तथा दिव्यांग अभ्यर्थियों को यूजीसी के प्रावधानों के अनुसार पांच प्रतिशत अंकों की छूट मिलेगी।

NET, SLET और SET होंगे अनिवार्य

नियमित नियुक्ति के लिए अभ्यर्थी का UGC NET, CSIR NET अथवा राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा (SLET/SET) उत्तीर्ण होना आवश्यक होगा। यह परीक्षा यूजीसी, सीएसआईआर, बिहार सरकार या यूजीसी द्वारा मान्यता प्राप्त एजेंसी द्वारा आयोजित होनी चाहिए।

किन पीएचडी धारकों को मिलेगी NET से छूट?

नई नियमावली में पीएचडी धारकों के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। यदि अभ्यर्थी ने नियमित (Regular Mode) से पीएचडी की है तथा उसका शोध प्रबंध कम से कम दो बाह्य परीक्षकों द्वारा मूल्यांकित किया गया है, खुला वाइवा (Open Viva) आयोजित हुआ है, पीएचडी शोध पर आधारित कम से कम दो शोधपत्र प्रकाशित किए गए हैं, जिनमें एक शोधपत्र रेफर्ड जर्नल में प्रकाशित हो तथा कम से कम दो शोधपत्र राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय सेमिनार अथवा सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए हों, तो ऐसे अभ्यर्थी को NET/SLET/SET से छूट मिलेगी। इन सभी शर्तों का प्रमाण विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार या डीन द्वारा प्रमाणित होना आवश्यक होगा।

इसके अतिरिक्त QS, Times Higher Education (THE) अथवा Academic Ranking of World Universities (ARWU) की वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष 500 विश्वविद्यालयों से पीएचडी करने वाले अभ्यर्थियों को भी यूजीसी के प्रावधानों के अनुसार पात्र माना जाएगा।

विशेष विषयों के लिए अलग प्रावधान

संगीत, परफॉर्मिंग आर्ट्स, दृश्य कला, पारंपरिक कला, नाटक और नाट्य जैसे विषयों में पात्रता यूजीसी विनियमों के अनुसार निर्धारित की जाएगी।

आयु सीमा क्या होगी?

नई नियमावली के अनुसार आवेदन करने वाले अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 21 वर्ष तथा अधिकतम आयु 43 वर्ष होगी। आयु की गणना विज्ञापन वर्ष की 1 अगस्त की तिथि के आधार पर की जाएगी।

आरक्षित वर्गों को बिहार सरकार के प्रचलित आरक्षण नियमों के अनुसार तथा दिव्यांग अभ्यर्थियों को भारत सरकार के नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी।

200 अंकों की होगी पूरी चयन प्रक्रिया

नियमित नियुक्ति के लिए चयन प्रक्रिया कुल 200 अंकों की होगी। इसमें 175 अंक लिखित परीक्षा तथा 25 अंक साक्षात्कार के लिए निर्धारित किए गए हैं। अंतिम मेरिट सूची लिखित परीक्षा और साक्षात्कार दोनों में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार की जाएगी।

साक्षात्कार के 25 अंकों में से 13 अंक टीचिंग स्किल डेमो के लिए होंगे। इस प्रदर्शन की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी। शेष 12 अंक साक्षात्कार बोर्ड के साथ व्यक्तिगत संवाद के आधार पर दिए जाएंगे।

ऐसा होगा लिखित परीक्षा का पैटर्न

लिखित परीक्षा तीन घंटे की होगी तथा कुल 175 अंकों की होगी।

प्रश्नपत्र में 20 अति लघु उत्तरीय प्रश्न होंगे, जिनमें प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा। इसके अतिरिक्त 15 लघु उत्तरीय प्रश्न दो-दो अंक के, 15 विश्लेषणात्मक प्रश्न तीन-तीन अंक के तथा 10 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न आठ-आठ अंक के होंगे। इस प्रकार कुल 60 प्रश्न पूछे जाएंगे।

इंटरव्यू के लिए न्यूनतम कितने अंक जरूरी होंगे?

लिखित परीक्षा में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को कम से कम 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करने होंगे।

पिछड़ा वर्ग के लिए न्यूनतम 36.5 प्रतिशत, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए 34 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए 32 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं।

निर्धारित न्यूनतम अंक प्राप्त करने वाले तथा रिक्तियों के मुकाबले अधिकतम 1:3 के अनुपात में आने वाले अभ्यर्थियों को ही साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। यदि किसी विषय में पर्याप्त संख्या में अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होते हैं तो सभी पात्र अभ्यर्थियों को साक्षात्कार का अवसर दिया जा सकता है।

मेरिट सूची कैसे तैयार होगी?

नियमित असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति के लिए अंतिम मेरिट सूची लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार की जाएगी। दोनों चरणों में प्राप्त अंकों को जोड़कर अभ्यर्थियों की अंतिम मेरिट निर्धारित होगी।

यदि दो या दो से अधिक अभ्यर्थियों के कुल अंक समान होते हैं तो सबसे पहले लिखित परीक्षा में अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी को वरीयता दी जाएगी। यदि लिखित परीक्षा के अंक भी समान हों तो अधिक आयु वाले अभ्यर्थी को उच्च स्थान दिया जाएगा। यदि इसके बाद भी स्थिति समान रहती है तो देवनागरी वर्णमाला के अनुसार जिसका नाम पहले आएगा, उसे मेरिट सूची में वरीयता मिलेगी।

मेरिट सूची तैयार होने के बाद अभ्यर्थियों को उनकी मेरिट और आवेदन के समय दिए गए विश्वविद्यालयों के विकल्प (Merit-cum-Choice) के आधार पर विश्वविद्यालय आवंटित किए जाएंगे।

साक्षात्कार बोर्ड का गठन कैसे होगा?

नियमावली के अनुसार साक्षात्कार बोर्ड का गठन बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के अध्यक्ष द्वारा किया जाएगा।

साक्षात्कार बोर्ड में संबंधित विषय के कम से कम तीन विशेषज्ञ शामिल होंगे। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि बोर्ड में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, महिला अथवा दिव्यांग वर्ग में से कम से कम एक विशेषज्ञ का प्रतिनिधित्व हो।

संविदा असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति कब होगी?

नई नियमावली में संविदा असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है।

संविदा नियुक्ति केवल आवश्यक अथवा आपात स्थिति में ही की जा सकेगी। यह व्यवस्था तब लागू होगी जब विश्वविद्यालय में छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखना संभव नहीं हो या नियमित नियुक्ति होने तक शिक्षण कार्य प्रभावित होने की संभावना हो।

संविदा नियुक्ति किसी भी स्थिति में स्वीकृत पदों की संख्या से अधिक नहीं की जा सकेगी।

संविदा असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रारंभ में केवल एक शैक्षणिक सत्र के लिए की जाएगी। आगे सेवा जारी रखने का निर्णय कार्य निष्पादन (Performance Review) के आधार पर लिया जाएगा।

नियमित पद पर नियुक्ति होने के साथ ही संबंधित संविदा नियुक्ति स्वतः समाप्त हो जाएगी।

संविदा नियुक्ति में API स्कोर के आधार पर होगा चयन

संविदा नियुक्ति के लिए अभ्यर्थियों का चयन API (Academic Performance Indicator) स्कोर तथा साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा।

शोध संबंधी उपलब्धियों के लिए पीएचडी और जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) पर 11-11 अंक निर्धारित किए गए हैं, जबकि NET उत्तीर्ण अभ्यर्थी को 8 अंक मिलेंगे। शोध संबंधी उपलब्धियों के लिए अधिकतम 22 अंक निर्धारित किए गए हैं।

स्नातकोत्तर अंकों का वेटेज

स्नातकोत्तर स्तर पर 80 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी को 26 अंक दिए जाएंगे।

70 प्रतिशत से 79.99 प्रतिशत अंक पर 23 अंक, 60 प्रतिशत से 69.99 प्रतिशत अंक पर 20 अंक तथा 55 प्रतिशत से 59.99 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर 17 अंक मिलेंगे।

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थियों को 50 प्रतिशत से 59.99 प्रतिशत अंक होने पर भी 17 अंक दिए जाएंगे।

स्नातक, इंटरमीडिएट और मैट्रिक के अंक भी जुड़ेंगे

स्नातक परीक्षा में 80 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने पर 17 अंक निर्धारित किए गए हैं।

70 प्रतिशत से 79.99 प्रतिशत अंक पर 15 अंक, 60 प्रतिशत से 69.99 प्रतिशत अंक पर 13 अंक, 55 प्रतिशत से 59.99 प्रतिशत अंक पर 11 अंक तथा 45 प्रतिशत से 54.99 प्रतिशत अंक पर 9 अंक मिलेंगे। 45 प्रतिशत से कम अंक होने पर कोई अंक नहीं दिया जाएगा।

इंटरमीडिएट (10+2) परीक्षा के लिए अधिकतम 13 अंक तथा मैट्रिक (10वीं) परीक्षा के लिए अधिकतम 10 अंक निर्धारित किए गए हैं। दोनों स्तरों पर अंक प्रतिशत के अनुसार आनुपातिक रूप से दिए जाएंगे।

संविदा नियुक्ति में साक्षात्कार

संविदा नियुक्ति के लिए साक्षात्कार कुल 12 अंकों का होगा।

इनमें 6 अंक टीचिंग स्किल डेमो तथा 6 अंक साक्षात्कार बोर्ड के साथ व्यक्तिगत संवाद के आधार पर दिए जाएंगे।

आरक्षण के क्या होंगे नियम?

नई नियमावली के अनुसार नियमित नियुक्तियों में बिहार सरकार की प्रचलित आरक्षण नीति लागू होगी।

भर्ती में विषयवार तथा श्रेणीवार आरक्षण रोस्टर का पालन किया जाएगा।

यदि किसी आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी सामान्य वर्ग की मेरिट में चयनित होता है तो उसे सामान्य वर्ग में समायोजित किया जाएगा और उसकी नियुक्ति आरक्षित कोटे में नहीं गिनी जाएगी।

नियुक्ति की प्रक्रिया

बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग चयनित अभ्यर्थियों की अनुशंसा उच्च शिक्षा विभाग को भेजेगा।

उच्च शिक्षा विभाग अनुशंसाओं को संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति को अग्रसारित करेगा। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद कुलपति नियुक्ति आदेश जारी करेंगे।

नियमित नियुक्तियों के मामले में आयोग की अनुशंसाओं को विश्वविद्यालय सिंडिकेट के समक्ष रखा जाएगा।

संविदा नियुक्तियों में आवश्यकता होने पर सिंडिकेट की स्वीकृति से पहले भी नियुक्ति पत्र जारी किया जा सकता है।

वेतनमान

नियमित असिस्टेंट प्रोफेसरों को बिहार सरकार द्वारा अंगीकृत यूजीसी वेतनमान के अनुसार वेतन मिलेगा।

संविदा असिस्टेंट प्रोफेसरों को नियमित असिस्टेंट प्रोफेसर के प्रवेश स्तर (Entry Level) के समकक्ष मूल वेतन तथा महंगाई भत्ता (Basic + DA) देय होगा।

जॉइनिंग से जुड़े नियम

नियमित नियुक्ति प्राप्त अभ्यर्थियों को सामान्यतः नियुक्ति पत्र जारी होने के एक महीने के भीतर योगदान देना होगा।

यदि कोई अभ्यर्थी लिखित आवेदन देकर समय की मांग करता है तो अधिकतम छह महीने तक का विस्तार दिया जा सकता है।

संविदा नियुक्ति प्राप्त अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी होने के सात दिनों के भीतर योगदान देना अनिवार्य होगा। संविदा नियुक्ति के मामलों में समय बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है।

यदि कोई चयनित अभ्यर्थी निर्धारित अवधि के भीतर योगदान नहीं देता है तो उसकी नियुक्ति स्वतः निरस्त मानी जाएगी।

नई नियमावली के प्रमुख प्रावधान

1 जुलाई 2026 से लागू नई नियमावली के तहत बिहार के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती अब 200 अंकों की चयन प्रक्रिया के माध्यम से होगी, जिसमें 175 अंकों की लिखित परीक्षा और 25 अंकों का साक्षात्कार शामिल होगा। टीचिंग स्किल डेमो को अनिवार्य बनाया गया है तथा उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी। नियमित नियुक्तियों के साथ-साथ संविदा नियुक्तियों के लिए भी अलग चयन प्रक्रिया, API आधारित मूल्यांकन, आरक्षण, मेरिट सूची, वेतन, नियुक्ति और जॉइनिंग से जुड़े विस्तृत प्रावधान अधिसूचित किए गए हैं। यह पूरी नियमावली 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हो चुकी है और राज्य के सभी संबंधित विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत महाविद्यालयों में लागू होगी।

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