Wednesday, 24 June 2026
Patna
Bihar Infra Tales

बिहार में चार नए न्यायालय भवनों को मंजूरी, महराजगंज, मोतिहारी, बेगूसराय और रजौली में ₹164.78 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत

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बिहार न्यायालय भवन परियोजनाएं
In This Article
  1. महराजगंज में बनेगा 10 कोर्ट वाला न्यायालय परिसर
  2. मोतिहारी में 20 कोर्ट भवन का होगा निर्माण
  3. बेगूसराय में बनेगा 15 कोर्ट वाला आधुनिक भवन
  4. रजौली में भी विकसित होगा नया न्यायालय परिसर
  5. केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करेंगी लागत
  6. न्यायिक सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती

बिहार मंत्रिपरिषद ने केंद्र प्रायोजित योजना के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में न्यायिक आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के लिए चार महत्वपूर्ण न्यायालय भवन परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। इन परियोजनाओं पर कुल ₹164.78 करोड़ खर्च किए जाएंगे।

स्वीकृत परियोजनियों में महराजगंज (सिवान), मोतिहारी (पूर्वी चंपारण), बेगूसराय और रजौली (नवादा) में नए न्यायालय भवनों का निर्माण शामिल है।

महराजगंज में बनेगा 10 कोर्ट वाला न्यायालय परिसर

अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय, महराजगंज (सिवान) में 10 कोर्ट भवन (G+5), एमिनिटी भवन (G+4) तथा हाजत भवन (G+1) के निर्माण के लिए ₹34.33 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।

इस परियोजना के तहत न्यायिक पदाधिकारियों और न्यायालय कर्मियों के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

मोतिहारी में 20 कोर्ट भवन का होगा निर्माण

व्यवहार न्यायालय, पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) परिसर में 20 कोर्ट भवन (G+5) के निर्माण के लिए ₹53.02 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।

परियोजना के पूरा होने के बाद न्यायिक कार्यों के संचालन के लिए अतिरिक्त कोर्ट रूम और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

बेगूसराय में बनेगा 15 कोर्ट वाला आधुनिक भवन

व्यवहार न्यायालय, बेगूसराय के परित्यक्त एसडीजेएम कोर्ट परिसर में 15 कोर्ट भवन (G+7) के निर्माण हेतु ₹39.04 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।

यह परियोजना न्यायालय परिसर में बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने और न्यायिक सेवाओं की क्षमता बढ़ाने में सहायक होगी।

रजौली में भी विकसित होगा नया न्यायालय परिसर

अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय, रजौली (नवादा) में 10 कोर्ट भवन (G+5), एमिनिटी भवन (G+4) एवं हाजत भवन (G+1) के निर्माण के लिए ₹38.38 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।

इस परियोजना के माध्यम से क्षेत्र में न्यायिक अवसंरचना को मजबूत किया जाएगा तथा न्यायालय संचालन के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करेंगी लागत

चारों परियोजनाएं केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत स्वीकृत की गई हैं। निर्माण कार्यों की लागत का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार तथा 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद न्यायिक पदाधिकारियों के लिए पर्याप्त संख्या में कोर्ट रूम, सहायक भवन तथा अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे न्यायिक कार्यों के संचालन में सुविधा मिलेगी।

न्यायिक सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती

राज्य सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं का उद्देश्य न्यायिक अवसंरचना का विस्तार करना और न्यायालय परिसरों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इससे न्यायिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और मामलों के प्रभावी निष्पादन में सहायता मिलेगी।

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