In This Article
बिहार में औद्योगिक विकास की स्थिति को लेकर लोकसभा में केंद्र सरकार ने विस्तृत जानकारी दी है। बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह के प्रश्न के उत्तर में वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति (BIIPP) 2024-27 के तहत पिछले तीन वित्तीय वर्षों में राज्य में 932 औद्योगिक निवेश प्रस्तावों को स्टेज-I मंजूरी दी गई है जिसमें 48,160.80 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, इनमें से अब तक केवल 442 औद्योगिक इकाइयां ही स्थापित होकर व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर सकी हैं, जिनमें 5,890.10 करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश हुआ है।
लोकसभा में सांसद सुधाकर सिंह ने केंद्र सरकार से पूछा था कि पिछले तीन वर्षों में केंद्र सरकार की विभिन्न औद्योगिक प्रोत्साहन एवं विनिर्माण योजनाओं के तहत बिहार में कितनी औद्योगिक इकाइयों को मंजूरी मिली, उनमें से कितनी इकाइयों ने वर्षवार एवं क्षेत्रवार उत्पादन शुरू किया, क्या सरकार ने बिहार में औद्योगिक विकास में बाधा बनने वाले संरचनात्मक कारणों का समग्र आकलन किया है तथा श्रम आधारित उद्योगों, एमएसएमई क्लस्टरों और कृषि आधारित मूल्य संवर्धन उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने अपने उत्तर में कहा कि औद्योगिक क्षेत्र का विकास मुख्य रूप से राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। हालांकि, केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों और नीतिगत पहलों के माध्यम से राज्यों के प्रयासों को सहयोग प्रदान करती है ताकि पूरे देश में औद्योगिक विकास को गति मिल सके।
तीन वर्षों में 932 निवेश प्रस्तावों को मंजूरी, 48,160 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का प्रस्ताव
सरकार के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में बिहार में 416 औद्योगिक निवेश प्रस्तावों को स्टेज-I मंजूरी दी गई, जिनमें 34,455.14 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव था। वर्ष 2025-26 में 322 प्रस्तावों को 7,515.98 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2026-27 में 194 प्रस्तावों को 6,189.68 करोड़ रुपये के निवेश के साथ मंजूरी मिली। इस प्रकार तीन वर्षों में कुल 932 निवेश प्रस्तावों को स्वीकृति मिली, जिनके कुल 48,160.80 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव सामने आया।
हालांकि, स्वीकृत परियोजनाओं का बड़ा हिस्सा अभी भी क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन प्रस्तावों में से केवल 442 औद्योगिक इकाइयां ही स्थापित होकर उत्पादन या व्यावसायिक संचालन शुरू कर सकी हैं। वर्ष 2024-25 में 237 इकाइयों ने 3,523.08 करोड़ रुपये, वर्ष 2025-26 में 166 इकाइयों ने 1,641.02 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2026-27 में केवल 39 इकाइयों ने 726 करोड़ रुपये के निवेश के साथ उत्पादन शुरू किया। तीन वर्षों में कुल वास्तविक निवेश 5,890.10 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
फूड प्रोसेसिंग में सबसे अधिक औद्योगिक गतिविधि, कई क्षेत्रों में सीमित निवेश
क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार बिहार में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर औद्योगिक विकास का सबसे बड़ा आधार बनकर उभरा है। पिछले तीन वर्षों में इस क्षेत्र की 231 इकाइयों ने 3,564.71 करोड़ रुपये के निवेश के साथ उत्पादन शुरू किया। इसके बाद जनरल मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में 90 इकाइयों ने 1,141.49 करोड़ रुपये, प्लास्टिक एवं रबर क्षेत्र में 46 इकाइयों ने 403.88 करोड़ रुपये, हेल्थकेयर क्षेत्र में 17 इकाइयों ने 327.02 करोड़ रुपये तथा टेक्सटाइल एवं लेदर क्षेत्र में 19 इकाइयों ने 172.77 करोड़ रुपये का निवेश कर उत्पादन शुरू किया।
इसके अलावा पर्यटन क्षेत्र में सात इकाइयों ने 89.90 करोड़ रुपये, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 13 इकाइयों ने 63.45 करोड़ रुपये, वुड बेस्ड इंडस्ट्री में 11 इकाइयों ने 60.22 करोड़ रुपये, स्मॉल मशीन मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में सात इकाइयों ने 29.31 करोड़ रुपये तथा लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में केवल एक इकाई ने 37.35 करोड़ रुपये के निवेश के साथ उत्पादन शुरू किया । इससे स्पष्ट है कि बिहार में औद्योगिक गतिविधियां अभी भी कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक ही सीमित हैं।
केंद्र ने गिनाईं औद्योगिक विकास के लिए चल रही प्रमुख योजनाएं
केंद्र सरकार ने बताया कि बिहार सहित सभी राज्यों में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कई राष्ट्रीय स्तर की योजनाएं लागू की जा रही हैं। इनमें स्कीम फॉर इन्वेस्टमेंट प्रमोशन, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार, अनुपालन बोझ कम करने की पहल, इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन स्कीम, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI), राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर के तहत इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (IMCs), स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया, प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP), नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS), इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक (IILB), प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) सुधार तथा प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप (PMG) जैसी पहल शामिल हैं।
एमएसएमई क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), क्रेडिट गारंटी स्कीम (CGTMSE), एमएसएमई क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम (MSE-CDP), रेजिंग एंड एक्सेलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (RAMP), सेल्फ रिलायंट इंडिया फंड, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिककरण योजना (PMFME), पीएम किसान सम्पदा योजना तथा राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। केंद्र ने कहा कि इन योजनाओं का लाभ पात्र एमएसएमई इकाइयों को पूरे देश में, बिहार सहित, निर्धारित पात्रता शर्तों के अनुसार उपलब्ध है।
औद्योगिक चुनौतियों पर भी केंद्र ने दिया जवाब
सांसद द्वारा बिहार में औद्योगिक विकास की बाधाओं को लेकर पूछे गए प्रश्न पर केंद्र सरकार ने कहा कि विभिन्न सरकारी पहलों के तहत समय-समय पर आवश्यकता आधारित आकलन किए जाते हैं। डीपीआईआईटी की लॉजिस्टिक्स ईज अक्रॉस डिफरेंट स्टेट्स (LEADS) रिपोर्ट और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (EoDB) मूल्यांकन के माध्यम से राज्यों में सुधारों की समीक्षा की जाती है। इन आकलनों से यह सामने आया है कि विभिन्न मानकों पर प्रगति हुई है, लेकिन बिहार सहित राज्यों में मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, औद्योगिक अवसंरचना, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और निवेश सुविधा को और मजबूत करने की आवश्यकता बरकरार है।
सरकार ने कहा कि इन चुनौतियों के समाधान के लिए प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन, राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास कार्यक्रम, पीएलआई योजना तथा श्रम आधारित उद्योगों, एमएसएमई और कृषि आधारित मूल्य संवर्धन उद्योगों को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के माध्यम से उद्यम स्थापना, क्लस्टर विकास, तकनीकी उन्नयन, ऋण सुविधा, वैल्यू एडिशन, बाजार से जुड़ाव और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित किया जा रहा है।



