Friday, 7 August 2026
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बिहार जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम, 2026 लागू: ऑनलाइन बेटिंग, सट्टेबाजी और जुआघरों पर सख्त कानून, 7 साल तक की जेल

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In This Article
  1. अधिनियम के दायरे में कौन-कौन सी गतिविधियां आएंगी
  2. भाग्य आधारित खेलों को भी किया गया स्पष्ट
  3. जुआघर चलाने से लेकर वित्तीय सहायता देने तक सब होगा अपराध
  4. पुराने कानून की जगह आया नया अधिनियम
  5. जुआघर चलाने और ऑनलाइन बेटिंग पर कड़े दंड का प्रावधान
  6. ऑनलाइन जुए पर सबसे सख्त प्रावधान
  7. बैंक खाते, वॉलेट और डिजिटल भुगतान पर भी कार्रवाई
  8. जुए के विज्ञापनों पर पूर्ण प्रतिबंध
  9. पुलिस को मिले व्यापक अधिकार
  10. डिजिटल रिकॉर्ड भी होंगे साक्ष्य
  11. कंपनियों और प्लेटफॉर्म की भी तय होगी जिम्मेदारी
  12. संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध, नए कानून का प्रभाव और क्या बदलेगा
  13. जब्त किए गए सामान और धन का क्या होगा
  14. राज्य सरकार को नियम बनाने का अधिकार
  15. 159 वर्ष पुराने कानून की जगह लागू हुआ नया अधिनियम

बिहार में ऑनलाइन बेटिंग, डिजिटल सट्टेबाजी और पारंपरिक जुआघरों के खिलाफ अब नया कानूनी ढांचा लागू हो गया है। बिहार सरकार ने बिहार जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम, 2026 का राजपत्र (गजट) जारी कर दिया है। बिहार विधानसभा से पारित होने के बाद अधिनियम को अधिसूचित किया गया है और यह राजपत्र में प्रकाशित होने की तिथि से पूरे राज्य में प्रभावी हो गया है। इस कानून का उद्देश्य राज्य में संचालित सभी प्रकार के जुए, सट्टेबाजी और उनसे जुड़े वित्तीय एवं डिजिटल नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।

यह अधिनियम केवल पारंपरिक जुआघरों तक सीमित नहीं है। पहली बार बिहार में ऑनलाइन जुआ, मोबाइल एप, वेबसाइट, इंटरनेट प्लेटफॉर्म, डिजिटल भुगतान, वर्चुअल माध्यम और इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क के जरिए संचालित होने वाली जुए की गतिविधियों को भी स्पष्ट रूप से कानून के दायरे में शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि पुराने कानून में आधुनिक डिजिटल माध्यमों से संचालित सट्टेबाजी और ऑनलाइन जुए को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के पर्याप्त प्रावधान नहीं थे, इसलिए नए अधिनियम की आवश्यकता महसूस की गई।

अधिनियम के दायरे में कौन-कौन सी गतिविधियां आएंगी

नए कानून में जुए की परिभाषा को पहले की तुलना में काफी व्यापक बनाया गया है। अधिनियम के अनुसार किसी अनिश्चित घटना के परिणाम पर धन, वर्चुअल करेंसी, डिजिटल संपत्ति या किसी अन्य मूल्यवान वस्तु को दांव पर लगाना जुआ माना जाएगा। इसके साथ ही किसी अन्य व्यक्ति को दांव लगाने के लिए प्रेरित करना, जुए का आयोजन करना, दांव या पुरस्कार की राशि का संग्रह एवं वितरण करना तथा जुए को बढ़ावा देने वाली किसी भी गतिविधि में शामिल होना भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित होने वाली बेटिंग, सट्टेबाजी और गेमिंग गतिविधियां भी इसी परिभाषा के अंतर्गत आएंगी। अधिनियम में स्पष्ट किया गया है कि कंप्यूटर, मोबाइल एप, वेबसाइट, इंटरनेट प्लेटफॉर्म, संचार नेटवर्क, सॉफ्टवेयर अथवा किसी अन्य डिजिटल माध्यम से संचालित जुए को भी ऑफलाइन जुए के समान माना जाएगा।

भाग्य आधारित खेलों को भी किया गया स्पष्ट

अधिनियम में पहली बार “भाग्य का खेल” (Game of Chance) की भी स्पष्ट परिभाषा दी गई है। ऐसे खेल, जिनका परिणाम मुख्य रूप से खिलाड़ी के कौशल के बजाय भाग्य या संयोग पर निर्भर करता है, उन्हें भाग्य आधारित खेल माना गया है। अनुसूची में बैकारा (Baccarat), बिग सिक्स व्हील, व्हील ऑफ फॉर्च्यून, क्रैप्स, फ्लश/थ्री कार्ड गेम, कीनो, पॉन्टून 21, रूलेट, स्लॉट मशीन और सुपर पैन 9 जैसे खेलों को इस श्रेणी में शामिल किया गया है। साथ ही राज्य सरकार को समय-समय पर अन्य भाग्य आधारित खेलों को भी इस सूची में जोड़ने का अधिकार दिया गया है।

जुआघर चलाने से लेकर वित्तीय सहायता देने तक सब होगा अपराध

अधिनियम के तहत केवल जुआ खेलने वालों के खिलाफ ही नहीं बल्कि जुए से जुड़े पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक या व्यावसायिक स्थान पर जुआघर संचालित करता है, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता है, जुए के लिए स्थान उपलब्ध कराता है, उसका संचालन या प्रबंधन करता है अथवा जुए के लिए वित्तीय सहायता या धन उपलब्ध कराता है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसी प्रकार किसी व्यक्ति को जुआ खेलने के लिए प्रोत्साहित करना या जुए से संबंधित गतिविधियों को सुविधाजनक बनाना भी दंडनीय अपराध होगा।

पुराने कानून की जगह आया नया अधिनियम

बिहार में अब तक Public Gambling Act, 1867 लागू था, जिसे औपनिवेशिक काल में बनाया गया था। अधिनियम में कहा गया है कि डिजिटल तकनीक और ऑनलाइन जुए के बढ़ते दायरे को देखते हुए पुराने कानून को निरस्त कर उसकी जगह बिहार जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम, 2026 लागू किया गया है। हालांकि पुराने कानून के तहत पहले की गई कार्रवाई, अधिसूचनाएं और कानूनी प्रक्रियाएं प्रभावित नहीं होंगी और उन्हें वैध माना जाएगा।

जुआघर चलाने और ऑनलाइन बेटिंग पर कड़े दंड का प्रावधान

बिहार जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम, 2026 में विभिन्न प्रकार के अपराधों के लिए अलग-अलग दंड निर्धारित किए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक या व्यावसायिक स्थान अथवा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से जुआघर संचालित करता है, जुए के लिए स्थान उपलब्ध कराता है, उसका संचालन या प्रबंधन करता है अथवा जुए के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है, तो पहली बार दोषी पाए जाने पर उसे कम से कम छह माह और अधिकतम तीन वर्ष तक के कारावास तथा ₹50,000 तक के जुर्माने की सजा हो सकती है। दोबारा अपराध करने पर यह सजा दो वर्ष से पांच वर्ष तक तथा ₹1 लाख तक के जुर्माने तक बढ़ सकती है।

सिर्फ जुआघर चलाना ही नहीं, बल्कि किसी जुआघर या ऑनलाइन जुआ प्लेटफॉर्म पर जुआ खेलते हुए या जुए के उद्देश्य से मौजूद पाए जाने पर भी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में आरोपी को छह माह तक की जेल, ₹10,000 तक का जुर्माना अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है।

ऑनलाइन जुए पर सबसे सख्त प्रावधान

नए कानून में ऑनलाइन जुए और डिजिटल सट्टेबाजी को विशेष रूप से निशाना बनाया गया है। यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन जुए में शामिल होता है या किसी अन्य व्यक्ति को ऑनलाइन जुआ खेलने के लिए प्रेरित करता है, तो पहली बार दोषी पाए जाने पर उसे कम से कम एक वर्ष और अधिकतम तीन वर्ष तक की जेल तथा ₹50,000 से ₹5 लाख तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

यदि वही व्यक्ति दोबारा अपराध करता है, तो कानून और अधिक कठोर हो जाता है। पुनरावृत्ति की स्थिति में कम से कम दो वर्ष और अधिकतम सात वर्ष तक का कारावास तथा ₹1 लाख से ₹10 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। ऑनलाइन जुए से जुड़े मामलों के लिए यही अधिनियम का सबसे कठोर दंडात्मक प्रावधान है।

बैंक खाते, वॉलेट और डिजिटल भुगतान पर भी कार्रवाई

अधिनियम में पहली बार जुए से जुड़े वित्तीय नेटवर्क को भी सीधे कानून के दायरे में लाया गया है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर अपना बैंक खाता, मोबाइल वॉलेट, डिजिटल वॉलेट या कोई अन्य वित्तीय खाता जुए अथवा ऑनलाइन बेटिंग के लिए उपलब्ध कराता है और उससे लाभ कमाता है, तो उसके खिलाफ भी आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में छह माह तक की जेल, ₹10,000 तक का जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है।

जुए के विज्ञापनों पर पूर्ण प्रतिबंध

अधिनियम के तहत जुए और सट्टेबाजी से जुड़े विज्ञापनों पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म या किसी अन्य संचार माध्यम के जरिए ऐसे विज्ञापन प्रकाशित या प्रसारित नहीं किए जा सकेंगे जिनमें भाग्य आधारित खेलों या जुए का प्रचार किया जाता हो।

यदि कोई व्यक्ति या संस्था इस प्रतिबंध का उल्लंघन करती है, तो उसे तीन वर्ष तक की जेल तथा ₹50,000 तक के जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।

पुलिस को मिले व्यापक अधिकार

अधिनियम में पुलिस को जुए के खिलाफ कार्रवाई के लिए व्यापक अधिकार दिए गए हैं। पुलिस उपनिरीक्षक (Sub-Inspector) या उससे ऊपर के अधिकारी किसी भी ऐसे स्थान या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर, जहां जुआ संचालित होने का संदेह हो, प्रवेश कर सकते हैं, तलाशी ले सकते हैं और संबंधित व्यक्तियों को गिरफ्तार कर सकते हैं।

कार्रवाई के दौरान पुलिस जुए से संबंधित नकदी, उपकरण, रजिस्टर, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त कर सकती है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि किसी बैंक खाते, मोबाइल वॉलेट या डिजिटल खाते का उपयोग जुए के लिए किया गया है, तो उसे फ्रीज करने का भी अधिकार पुलिस को दिया गया है।

डिजिटल रिकॉर्ड भी होंगे साक्ष्य

अधिनियम में स्पष्ट किया गया है कि मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, डिजिटल दस्तावेज, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और जुए से संबंधित अन्य डिजिटल सामग्री को वैध साक्ष्य माना जाएगा। यदि किसी डिवाइस में जुआ या सट्टेबाजी से संबंधित एप्लिकेशन डाउनलोड या उपयोग किया गया पाया जाता है, तो उसे जुए से संबंधित उपकरण माना जाएगा, हालांकि संबंधित व्यक्ति को यह साबित करने का अवसर मिलेगा कि उसका उपयोग किसी वैध उद्देश्य के लिए किया गया था।

कंपनियों और प्लेटफॉर्म की भी तय होगी जिम्मेदारी

यदि कोई कंपनी, संस्था या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म इस अधिनियम का उल्लंघन करता है, तो केवल कंपनी ही नहीं बल्कि उसके निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य जिम्मेदार अधिकारी भी कार्रवाई के दायरे में आएंगे। हालांकि यदि कोई अधिकारी यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी या सहमति के बिना हुआ और उसने उसे रोकने का पूरा प्रयास किया था, तो उसे राहत मिल सकती है।

संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध, नए कानून का प्रभाव और क्या बदलेगा

बिहार जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम, 2026 में जुए से जुड़े अपराधों को उनकी गंभीरता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है। अधिनियम के तहत कुछ अपराध संज्ञेय एवं जमानती होंगे, जबकि अधिक गंभीर अपराध संज्ञेय एवं गैर-जमानती माने जाएंगे। अधिनियम की धाराओं के अनुसार जुआघर चलाना, ऑनलाइन जुए का संचालन, जुए का प्रचार-प्रसार और अन्य गंभीर अपराध गैर-जमानती श्रेणी में रखे गए हैं, जबकि कुछ अपेक्षाकृत कम गंभीर अपराध जमानती होंगे। साथ ही, इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाले मामलों की सुनवाई प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी (Judicial Magistrate First Class) से नीचे की कोई अदालत नहीं कर सकेगी।

जब्त किए गए सामान और धन का क्या होगा

यदि किसी व्यक्ति को जुआघर चलाने, उसका उपयोग करने या जुआ खेलने के अपराध में दोषी ठहराया जाता है, तो अदालत जुए में इस्तेमाल किए गए उपकरणों को नष्ट करने का आदेश दे सकती है। इसके अलावा जब्त की गई नकदी, प्रतिभूतियों तथा अन्य संपत्तियों को बेचकर उनकी राशि सरकार के पक्ष में जब्त की जा सकती है। हालांकि न्यायालय को यह अधिकार भी दिया गया है कि यदि किसी संपत्ति पर किसी अन्य व्यक्ति का वैध अधिकार सिद्ध होता है तो उसका हिस्सा उसे वापस किया जा सकता है।

राज्य सरकार को नियम बनाने का अधिकार

अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बिहार सरकार को समय-समय पर नियम बनाने का अधिकार दिया गया है। सरकार राजपत्र में अधिसूचना जारी कर आवश्यक नियम बना सकेगी और ऐसे नियमों को बाद में बिहार विधानमंडल के समक्ष रखा जाएगा। यदि अधिनियम को लागू करने में किसी प्रकार की व्यावहारिक कठिनाई आती है, तो सरकार अधिसूचना के माध्यम से आवश्यक आदेश जारी कर सकेगी। यह व्यवस्था अधिनियम लागू होने की तिथि से दो वर्ष तक प्रभावी रहेगी।

159 वर्ष पुराने कानून की जगह लागू हुआ नया अधिनियम

बिहार जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम, 2026 लागू होने के साथ ही राज्य में प्रभावी Public Gambling Act, 1867 को निरस्त कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि औपनिवेशिक दौर में बनाया गया यह कानून ऑनलाइन जुए, डिजिटल भुगतान, मोबाइल एप और इंटरनेट आधारित बेटिंग जैसी आधुनिक चुनौतियों से निपटने में सक्षम नहीं था। इसी कारण नए कानून में डिजिटल माध्यमों, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वित्तीय नेटवर्क को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। हालांकि पुराने कानून के तहत पहले की गई कार्रवाई, अधिसूचनाएं और कानूनी प्रक्रियाएं वैध बनी रहेंगी।

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बिहार इंफ्रा टेल्स डेस्क बिहार की आधारभूत संरचना, विकास, निवेश, नीतियों और शासन से जुड़ी खबरों को कवर करता है।

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