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बिहार में विशेष आर्थिक क्षेत्रों (Special Economic Zones-SEZ) के विकास को लेकर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने बताया कि राज्य में अब तक दो SEZ अधिसूचित किए गए हैं, लेकिन इनमें से एक भी अभी तक परिचालन शुरू नहीं कर पाया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मुजफ्फरपुर, फतुहा या मिथिला क्षेत्र में मखाना एवं एग्रो आधारित SEZ स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार को अब तक कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।
डॉ. भीम सिंह द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में सरकार ने बताया कि बिहार में पश्चिम चंपारण जिले के कुमारबाग तथा बक्सर जिले के नवानगर औद्योगिक क्षेत्र में दो विशेष आर्थिक क्षेत्रों को अधिसूचित किया गया था। इन दोनों परियोजनाओं के डेवलपर बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) हैं और इनका प्रस्ताव बिहार सरकार द्वारा भेजा गया था। हालांकि अधिसूचना जारी होने के बावजूद दोनों SEZ अभी तक पूरी तरह से परिचालन शुरू नहीं कर सके हैं।
केंद्र सरकार के अनुसार इन परियोजनाओं के परिचालन में देरी के पीछे कई कारण हैं। इनमें उद्यमियों द्वारा इकाइयाँ स्थापित करने में अपेक्षित रुचि न दिखाना, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव के कारण परियोजनाओं की व्यावसायिक व्यवहार्यता प्रभावित होना, भौगोलिक चुनौतियाँ तथा आसपास पर्याप्त विनिर्माण एवं सेवा आधारित औद्योगिक इकोसिस्टम का विकसित न होना प्रमुख कारण हैं।
दोनों SEZ में ₹204 करोड़ से अधिक के इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य जारी
हालांकि दोनों SEZ अभी तक परिचालन शुरू नहीं कर सके हैं, लेकिन इनके विकास की दिशा में इस वर्ष महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) ने दोनों विशेष आर्थिक क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे (Infrastructure) के निर्माण के लिए ठेके आवंटित किए हैं और वर्तमान में निर्माण कार्य जारी है।
पश्चिम चंपारण के कुमारबाग औद्योगिक क्षेत्र स्थित SEZ में ₹107.01 करोड़ की लागत से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का कार्य जय माता दी रोड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया है। वहीं बक्सर के नवानगर औद्योगिक क्षेत्र स्थित SEZ में ₹97.37 करोड़ की लागत से आधारभूत ढांचे के निर्माण का ठेका विश्वा समुद्र इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया है।
इस प्रकार दोनों SEZ के लिए कुल ₹204.38 करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण कार्य इस वर्ष आवंटित किए गए हैं। हालांकि, केंद्र सरकार के अनुसार इन परियोजनाओं में अभी तक कोई औद्योगिक इकाई परिचालन में नहीं आई है।
मुजफ्फरपुर, फतुहा और मिथिला SEZ पर केंद्र का जवाब
राज्यसभा में पूछे गए प्रश्न में मुजफ्फरपुर, फतुहा तथा मिथिला क्षेत्र में मखाना एवं एग्रो आधारित SEZ की प्रगति के बारे में भी जानकारी मांगी गई थी। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि इन क्षेत्रों में किसी भी नए SEZ की स्थापना के लिए अब तक कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। यानी फिलहाल मुजफ्फरपुर, फतुहा या मिथिला क्षेत्र में प्रस्तावित किसी SEZ पर केंद्र सरकार के स्तर पर कोई प्रक्रिया लंबित नहीं है।
SEZ स्थापित करने की प्रक्रिया और केंद्र की भूमिका
केंद्र सरकार ने अपने उत्तर में बताया कि विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) मुख्य रूप से निजी निवेश आधारित परियोजनाएं होती हैं। SEZ अधिनियम, 2005 और SEZ नियम, 2006 के तहत किसी भी नए SEZ के प्रस्ताव पर तभी विचार किया जाता है, जब संबंधित राज्य सरकार उसकी अनुशंसा करते हुए उसे बोर्ड ऑफ अप्रूवल (Board of Approval) के समक्ष भेजती है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार स्वयं SEZ की डेवलपर की भूमिका नहीं निभाती। इसके अलावा SEZ की स्थापना के लिए केंद्र सरकार कोई प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता या विशेष बजटीय अनुदान भी उपलब्ध नहीं कराती।
नए प्रस्ताव के बिना आगे नहीं बढ़ेगी प्रक्रिया
केंद्र सरकार के जवाब से स्पष्ट है कि बिहार में अधिसूचित दोनों विशेष आर्थिक क्षेत्र अभी तक परिचालन शुरू नहीं कर सके हैं, हालांकि इनके लिए आधारभूत ढांचे के निर्माण का कार्य अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। दूसरी ओर, मुजफ्फरपुर, फतुहा तथा मिथिला क्षेत्र में मखाना एवं एग्रो आधारित SEZ की मांग को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है, लेकिन इन क्षेत्रों के लिए केंद्र सरकार को अब तक कोई औपचारिक प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में राज्य सरकार की ओर से प्रस्ताव भेजे जाने और आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद ही इन क्षेत्रों में नए SEZ स्थापित करने की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।



