Tuesday, 23 June 2026
Patna
Bihar Infra Tales

बिहार में जमीन रजिस्ट्री महंगी होगी, ग्रामीण क्षेत्रों में MVR 1.6 गुना और शहरी इलाकों में 2 गुना बढ़ाने का फैसला

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MVR
In This Article
  1. पूरे बिहार में भूमि वर्गीकरण होगा एक समान
  2. हर तीन वर्ष पर होगा MVR का व्यापक पुनरीक्षण
  3. हर साल स्वतः बढ़ेगी MVR दर
  4. पहली बार लागू होगी Summary Revision
  5. MVR निर्धारण की प्रक्रिया में भी बदलाव
  6. रजिस्ट्री और स्टाम्प शुल्क पर पड़ सकता है असर
  7. क्या है MVR?

बिहार सरकार ने भूमि और संपत्ति के न्यूनतम मूल्यांकन (Minimum Value Register-MVR) से जुड़े नियमों में बड़ा संशोधन किया है। नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में MVR दरों में एकमुश्त 1.6 गुना और शहरी एवं परिधीय क्षेत्रों में 2 गुना वृद्धि की जाएगी। इसके साथ ही हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत में MVR दरों में स्वतः 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी लागू होगी। यह बदलाव बिहार स्टाम्प (लिखत का न्यून मूल्यांकन निवारण) (संशोधन) नियमावली, 2026 के तहत किया गया है।

18 जून 2026 को जारी अधिसूचना 19 जून 2026 को बिहार गजट में प्रकाशित हुई और इसके साथ ही नई नियमावली पूरे राज्य में प्रभावी हो गई।

पूरे बिहार में भूमि वर्गीकरण होगा एक समान

नई नियमावली के तहत पूरे बिहार में भूमि वर्गीकरण की एकरूप व्यवस्था लागू की जाएगी। अब ग्रामीण, परिधीय और शहरी क्षेत्रों में भूमि की श्रेणियां निर्धारित कर उसी आधार पर न्यूनतम मूल्यांकन दरें तय की जाएंगी।

ग्रामीण एवं परिधीय क्षेत्रों में भूमि को सात श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:

  • व्यावसायिक भूमि
  • औद्योगिक भूमि
  • आवासीय भूमि
  • राष्ट्रीय राजमार्ग एवं मुख्य जिला सड़कों के किनारे की भूमि
  • सिंचित भूमि
  • असिंचित भूमि
  • अनुपजाऊ भूमि (बलुआही, पथरीली, दियारा एवं चंवर भूमि)

वहीं शहरी एवं महानगरीय क्षेत्रों में भूमि को छह श्रेणियों में बांटा गया है:

  • प्रधान सड़क पर स्थित व्यावसायिक/आवासीय भूमि
  • मुख्य सड़क पर स्थित व्यावसायिक/आवासीय भूमि
  • औद्योगिक भूमि
  • शाखा सड़क पर स्थित व्यावसायिक/आवासीय भूमि
  • अन्य सड़कों (गलियों) की आवासीय भूमि
  • कृषि/गैर-आवासीय भूमि

हर तीन वर्ष पर होगा MVR का व्यापक पुनरीक्षण

संशोधित नियमों के अनुसार जिला मूल्यांकन समिति प्रत्येक तीन वर्ष पर जिले के शहरी, परिधीय और ग्रामीण क्षेत्रों के सभी मौजा एवं वार्डों में भूमि और संपत्ति के न्यूनतम मूल्यांकन का व्यापक पुनरीक्षण करेगी। इसके आधार पर Minimum Value Register (MVR) को अपडेट किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि इससे बाजार मूल्य और सरकारी मूल्यांकन के बीच अंतर को कम करने में मदद मिलेगी।

हर साल स्वतः बढ़ेगी MVR दर

नई व्यवस्था के तहत तीन वर्ष के पुनरीक्षण चक्र के बीच MVR दरों में प्रत्येक वित्तीय वर्ष की शुरुआत में स्वतः 5 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। यह वृद्धि सभी श्रेणियों की भूमि पर लागू होगी।

इससे MVR दरों को बाजार परिस्थितियों के अनुरूप अद्यतन रखने में सहायता मिलेगी और लंबे समय तक दरों में स्थिरता की स्थिति नहीं बनेगी।

पहली बार लागू होगी Summary Revision

अधिसूचना के अनुसार संशोधित नियमों के तहत पहली बार Summary Revision लागू किया जाएगा। इसके तहत वर्तमान MVR दरों में एकमुश्त वृद्धि की जाएगी।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में MVR दरें 1.6 गुना बढ़ेंगी।
  • शहरी एवं परिधीय क्षेत्रों में MVR दरें 2.0 गुना बढ़ेंगी।

इसके बाद संशोधित दरों पर प्रत्येक वर्ष 5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि लागू होगी।

MVR निर्धारण की प्रक्रिया में भी बदलाव

सरकार ने MVR निर्धारण की प्रक्रिया में भी संशोधन किया है। अब जिला अवर निबंधक प्रत्येक तीन वर्ष पर नवंबर माह में जिला मूल्यांकन समिति से पुनरीक्षण की स्वीकृति प्राप्त करेंगे। इसके बाद संबंधित क्षेत्र में पंजीकृत संपत्तियों के आंकड़े संकलित कर समिति को उपलब्ध कराए जाएंगे।

नई व्यवस्था के तहत भूमि और संपत्ति के मूल्यांकन के लिए अब पांच के बजाय दस सर्वाधिक मूल्य वाले हस्तांतरण दस्तावेजों के औसत का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए नियम 6(2)(f)(viii) में संशोधन किया गया है।

इसके अलावा नियम 6(2)(f)(vii) को समाप्त कर दिया गया है।

रजिस्ट्री और स्टाम्प शुल्क पर पड़ सकता है असर

MVR दरों में वृद्धि का सीधा प्रभाव भूमि और संपत्ति की रजिस्ट्री पर पड़ सकता है। चूंकि स्टाम्प शुल्क और निबंधन शुल्क का निर्धारण न्यूनतम मूल्यांकन दरों के आधार पर किया जाता है, इसलिए नई दरें लागू होने के बाद कई क्षेत्रों में रजिस्ट्री की लागत बढ़ सकती है।

हालांकि वास्तविक प्रभाव विभिन्न जिलों, भूमि श्रेणियों और स्थानीय MVR दरों के आधार पर अलग-अलग होगा।

क्या है MVR?

Minimum Value Register (MVR) वह न्यूनतम मूल्य है जिसके आधार पर भूमि और संपत्ति की रजिस्ट्री के समय स्टाम्प शुल्क और निबंधन शुल्क निर्धारित किया जाता है। यदि किसी संपत्ति का बाजार मूल्य MVR से कम दर्शाया जाता है, तो शुल्क की गणना MVR के आधार पर की जाती है।

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