Monday, 22 June 2026
Patna
Bihar Infra Tales

बिहार के 211 नए डिग्री कॉलेजों में 1 जुलाई से शुरू होंगी पढ़ाई, राजभवन ने तैयारियों को लेकर जारी किए निर्देश

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Bihar New Degree Colleges
In This Article
  1. 1 जुलाई से शैक्षणिक गतिविधियां शुरू करने का लक्ष्य
  2. 30 जून तक पूरी करनी होंगी बुनियादी व्यवस्थाएं
  3. कॉलेजों को मिलेंगे 30-30 लाख रुपये
  4. 25 एकड़ और 5 एकड़ भूमि मानक पर चर्चा
  5. छह विषयों में शिक्षकों की कमी, वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार
  6. सभी कुलपतियों के साथ हुई समीक्षा बैठक
  7. उच्च शिक्षा विस्तार की दिशा में बड़ा कदम

बिहार में उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में शुरू किए गए 211 नवस्थापित डिग्री कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियां शुरू करने की तैयारियां तेज हो गई हैं। 1 जून 2026 को बिहार लोक भवन, पटना में राज्यपाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में राज्य के सभी कुलपतियों के साथ इन कॉलेजों की वर्तमान स्थिति और शैक्षणिक सत्र शुरू करने की तैयारियों की समीक्षा की गई।

बैठक में राज्यपाल ने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया कि नए कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। साथ ही नियमित संवाद स्थापित कर छात्रों की समस्याओं और सुझावों पर ध्यान देने को कहा गया।

1 जुलाई से शैक्षणिक गतिविधियां शुरू करने का लक्ष्य

बैठक में विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया गया कि चिन्हित स्थानों पर डिग्री कॉलेजों के संचालन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूरी कर ली जाएं, ताकि 1 जुलाई 2026 से शैक्षणिक गतिविधियां शुरू की जा सकें।

इसके लिए भूमि की उपलब्धता, भवन निर्माण, आवश्यक आधारभूत संरचना, फर्नीचर, बिजली, पेयजल और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। साथ ही शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को भी प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया।

30 जून तक पूरी करनी होंगी बुनियादी व्यवस्थाएं

बैठक में बिहार सरकार के अपर मुख्य सचिव ने सात निश्चय-3 (2025-30) के तहत “उन्नत शिक्षा-उज्ज्वल भविष्य” कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी तैयारियां 30 जून तक पूरी कर ली जाएं।

निर्देश दिया गया कि सभी चिन्हित महाविद्यालयों में बिजली आपूर्ति, शौचालय, पेयजल, ब्लैकबोर्ड, डेस्क-बेंच, कंप्यूटर, वाटर कूलर और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि पढ़ाई शुरू होने में कोई बाधा न आए।

कॉलेजों को मिलेंगे 30-30 लाख रुपये

बैठक में जानकारी दी गई कि नवस्थापित 211 डिग्री कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियां शुरू करने के लिए प्रत्येक कॉलेज को ₹30 लाख उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी जा रही है। यह राशि फर्नीचर, स्टेशनरी और अन्य आवश्यक सामग्री की खरीद के लिए उपयोग की जाएगी।

इसके लिए प्रत्येक कॉलेज में प्राचार्य और क्रय समिति के गठन का भी प्रस्ताव रखा गया है, ताकि आवश्यक संसाधनों की खरीद प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके।

25 एकड़ और 5 एकड़ भूमि मानक पर चर्चा

बैठक में नए कॉलेजों के स्थायी परिसर निर्माण को लेकर भी चर्चा हुई। शहरी क्षेत्रों में 25 एकड़ और ग्रामीण क्षेत्रों में 5 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने के मानक पर विचार किया गया।

इसके अलावा बिहार शैक्षणिक संरचना विकास निगम तथा बिहार राज्य भवन निर्माण निगम द्वारा मॉडल अनुमान तैयार करने और सभी 211 कॉलेजों के नामकरण को संबंधित प्रखंड के पूर्व राजकीय डिग्री महाविद्यालयों से जोड़ने का प्रस्ताव भी रखा गया।

छह विषयों में शिक्षकों की कमी, वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार

बैठक में बताया गया कि हिंदी, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, इतिहास, राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र विषयों में पर्याप्त संख्या में नियमित शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।

इस स्थिति को देखते हुए अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति, रिटायर्ड शिक्षकों की सेवाएं लेने और 211 सरकारी कॉलेजों में बहु-कार्य कर्मियों (MTS) की नियुक्ति का प्रस्ताव रखा गया। इसके अतिरिक्त श्रम संसाधन विभाग द्वारा निर्धारित दरों पर कंप्यूटर ऑपरेटर नियुक्त करने का सुझाव भी दिया गया।

सभी कुलपतियों के साथ हुई समीक्षा बैठक

बैठक में पटना विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय सहित राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक के अंत में राज्यपाल ने उच्च शिक्षा प्रणाली और भर्ती प्रक्रियाओं का अध्ययन करने के लिए सचिव स्तर के 3-4 सदस्यों की एक समिति गठित करने का भी निर्णय लिया, जो अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर आवश्यक सुझाव देगी।

उच्च शिक्षा विस्तार की दिशा में बड़ा कदम

211 नए डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई शुरू होने से बिहार के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य विद्यार्थियों को उनके निकट उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराना और राज्य में सकल नामांकन अनुपात (GER) को बढ़ाना है।

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